Aapki Chopal News

  • नागरिक सुरक्षा कोर सिविल डिफेंस प्रवासी श्रमिकों के सहयोग के लिए पुलिस प्रशासन के साथ ड्यूटी का निर्वाह किया

    रिपोर्ट पुनीत शर्मा मुरादाबाद 
    महानगर में आज दिनांक 16 मई 2020 को नागरिक सुरक्षा कोर सिविल डिफेंस पोस्ट कोठीवाल नगर द्वारा प्रातः 7:00 बजे चड्ढा सिनेमा एवं इंपीरियल तिराहा पर जिलाधिकारी एवं अपर जिलाधिकारी जी के आदेशानुसार एवं नागरिक सुरक्षा कोर कार्यालय के निर्देशानुसार आज मुरादाबाद महानगर से अपने गंतव्य पर ट्रेनों द्वारा मुरादाबाद लौट रहे प्रवासी श्रमिकों के सहयोग के लिए पुलिस प्रशासन के साथ  ड्यूटी का निर्वाह किया।

    नागरिक सुरक्षा कोर सिविल डिफेंस के चीफ आदरणीय श्री नजमुल इस्लाम साहब एवं एडीसी गुलाम नबी जी द्वारा इंपीरियल तिराहे पर सभी वॉलिंटियर्स का उत्साहवर्धन किया गया।
    कोठीवाल नगर के आई सी ओ श्री सुभाष जैन जी एवं पोस्ट वार्डन श्री नवनीत किशोर जैन जी, डिप्टी पोस्ट वार्डन श्री जनाब शाकिर हुसैन साहब एवं सेक्टर वार्डन एडवोकेट विपुल अग्रवाल एवं एडवोकेट चक्रेश लोहिया जी द्वारा सहयोग दिया गया।

  • मुरादाबाद से पलायन कर रहे मजदूरों के लिए रेल यात्रा शुरू

    मुरादाबाद

    मुरादाबाद। लोक डाउन के चलते पूरा देश बंद है लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं। उधर दूरदराज से काम करने आए मजदूर लॉक डाउन में फस कर ही रह गए  इसी के मद्देनजर भारत सरकार ने श्रमिक ट्रेन का संचालन कर सभी प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने का फैसला किया और एक ट्रेन चलाकर प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेज दिया। शासन प्रशासन द्वारा सभी प्रवासी मजदूरों को पीने के पानी से लेकर खाने तक की सहायता प्रदान की गई। रेलवे विभाग एवं पुलिस प्रशासन द्वारा रेलवे स्टेशन से श्रमिक ट्रेन का संचालन कर हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को रवाना किया। इस मौके पर मंडलायुक्त विरेंद्र कुमार सिंह, डीआरएम तरुण प्रकाश , आईजी रमित शर्मा, जिला अधिकारी राकेश कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक अमित पाठक, अपर  जिलाधिकारी राजेश कुमार सेगर, पुलिस अधीक्षक नगर अमित कुमार आनंद एवं पुलिस व प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद रहे। सभी प्रवासी मजदूरों का रेल यात्रा से पहले  स्क्रीनिंग करके उनको मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट भी दिया गया। सभी प्रवासी मजदूर बिहार, बंगाल के बताए गए। श्रमिक ट्रेन से 1584 प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजा गया। 

    लॉक डाउन की वजह से देश के अलग अलग राज्यों में फंसे कामगारों को उनकी मज़िल तक पहुंचाने के लिये केंद्र सरकार ने श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन शुरू किया है,   मुरादाबाद में भी आज पहली श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन से 1584 कामगारों को जांच के बाद बिहार के लिए रवाना किया गया। इस अवसर पर मुरादाबाद मंडल के पुलिस प्रशासन व रेलवे के अधिकारी मौजूद रहे |
  • कांठ विधायक ने छजलैट थाने का दौरा कर करवाया सेनिटाइज

    कांठ : कांठ विधायक राजेश कुमार चुन्नू ने शुक्रवार को छजलैट थाने का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं को जाना और संपूर्ण थाने को सैनिटाइज करवाया

    विधायक ने थाने के समस्त स्टाफ को पेन का वितरण किया और लॉकडाउन की व्यवस्था सुनिश्चित कर रहे समस्त स्टाफ का धन्यवाद देते हुए उनका मनोबल बढ़ाया
    इसके बाद छजलैट एवं रमपुरा गांव को सेनीटाइज करवाया एवं राशन डीलरों के पास औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया
    विधायक द्वारा तैयार किए गए कोरोना योद्धा टीम के संचालक विक्रांत चौधरी ने गांव गांव जाकर ग्रामवासियों की समस्याओं को सुना एवं राशन कार्ड में नाम कट चुके व्यक्तियों की सूची बनाकर उनको जल्द राशन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया

     विक्रांत सिंह ढिल्लन ने बताया कि हमारी टीम के योद्धा बहुत ही तेज गति के साथ कार्य कर रहे हैं

    इस मौके पर विक्रांत सिंह ढिल्लन, पाकबडा मंडल अध्यक्ष मयंक अग्रवाल, जिला मंत्री सुमित दिवाकर, उदित शर्मा, वीर सिंह, दुष्यंत सिंह, संजय ढाका, मंडल अध्यक्ष राम किशोर सिंह, मंडल प्रभारी हुकम सिंह, करतार सिंह, जयपाल सिंह उपस्थित रहे

  • पीएम मोदी ने औरैया सड़क हादसे के लिए जताया दुःख

    पीएम मोदी ने औरैया सड़क हादसे के लिए जताया दुःख 

  • ठाकुर मनीष सिंह बने मजदूरों के लिए सहारा

     ब्लॉक प्रमुख ठाकुर मनीष सिंह कोरोना महामारी के चलते बेरोजगार  मजदूरों के लिए सहारा बनें |
    ३१ मार्च से मोदी योगी रसोई चलवाकर मनीष जनता की सेवा में लगे हैं वह घर घर जाकर परेशां लोगो को राशन किट तो दे रहें है साथ ही गली गली में सेनेटीजिंग का कार्य भी करा रहें है |

    [youtube=https://www.youtube.com/watch?v=9MkaQeSblDs&w=320&h=266]

    लोगो को खाना खिला कर देश सेवा का जो कार्य मनीष सिंह कर रहें  है वह सरहानीय है क्योकि सारा खर्च वो अपने पास से कर रहे हैं उनकी इस कार्य में मदद करने के लिए उनके साथी व् मित्र उनका भरपूर सहयोग कर रहे हैं | 

    तस्वीर  

    वीडियो में आप देख सकते है की ब्लॉक प्रमुख खाना बना रहें हैं 
    लॉक डाउन में अब तक न जाने कितने बेसहारा लोगो के मदद कर चुके मनीष जी का कहना है के हम सेवा लोगो की भलाई के लिए कर रहें हैं 
    ठाकुर मनीष सिंह पिछले कई वर्षो से समाज सेवा कर रहें हैं 

  • अभिनय चौधरी ने पलायन कर रहे मजदूरों को घर पहुंचाने में की मदद

    आज हम आपको मिलवाते हैं पाकबडा थाना क्षेत्र के गांव गुरैठा के रहने वाले वरिष्ठ समाजसेवी एवं मुरादाबाद के भाजपा जिला उपाध्यक्ष अभिनय चौधरी से

    जो 31 मार्च से लगातार मोदी योगी रसोई का संचालन करवा रहे हैं

    और प्रतिदिन दिव्यांग व्यक्तियों को उनके घर घर जाकर राशन किट वितरित कर रहे हैं

    वीडियो  यहां पर देखें >>>>

    [youtube=https://www.youtube.com/watch?v=a_N0xh4_LWg&w=320&h=266]

     अभिनय चौधरी प्रतिदिन अपने निजी वाहन से कांठ रोड पर चलने वाले पलायन कर रहे मजदूरों को खाना खिला कर उनको आर्थिक रूप से भी मदद कर रहे हैं

    और उनको वाहन उपलब्ध कराकर उनके गंतव्य तक रवाना कर रहे हैं

     अभिनय चौधरी द्वारा मानव सेवा के अलावा पशु पक्षियों को भी प्रतिदिन खाना खिलाया जा रहा है

    अभिनय चौधरी यह कार्य किसी एक गांव या एक क्षेत्र में ना करके समस्त क्षेत्र में सर्वसमाज के लिए निस्वार्थ कार्य कर रहे हैं

    अभिनय चौधरी ने बताया कि अपना कर्म और धर्म समझकर हम प्रतिदिन लोगों की मदद कर रहे हैं

    इसमें हमारा कोई निजी स्वार्थ नहीं है

     आज देश को हमारे सहयोग की जरूरत है

    हम आपसी सहयोग से ही इस कोरोना जैसी महामारी पर विजय प्राप्त कर सकते हैं

    अभिनय चौधरी ने बताया अगर लॉकडाउन आगे के लिए बढ़ाया जाता है या जब तक लॉकडाउन रहता है
    तब तक हमारा सेवा कार्य निरंतर जारी रहेगा

    अभिनय चौधरी ने आज की युवा पीढ़ी से गरीब लोगों की मदद करने का भी आवाहन किया

  • कश्मीर का इतिहास और विवाद

    जम्मू कश्मीर का इतिहास और विवाद

    कश्मीरी पंडित, शेख़ अब्दुल्ला और राज्य के ज़्यादातर मुसल्मान 
    कश्मीर का भारत में ही विलय चाहते थे (क्योंकि भारत धर्मनिर्पेक्ष है)। 
    पर पाकिस्तान को ये बर्दाश्त ही नहीं था

    भूपेंद्र प्रकाश शर्मा , मुरादाबाद , उत्तर प्रदेश  पूरी जानकारी के लिए फोटो पर टच करो 

    जम्मू और कश्मीर भारत के सबसे उत्तर में स्थित राज्य है। पाकिस्तान इसके उत्तरी इलाके के हिस्सों पर क़ाबिज़ है, जबकि चीन ने अक्साई चिन पर कब्ज़ा किया हुआ है। भारत इन कब्ज़ों को अवैध मानता है जबकि पाकिस्तान भारतीय जम्मू और कश्मीर को एक विवादित क्षेत्र मानता है। जम्मू कश्मीर की आधिकारिक भाषा हिंदी उर्दू है।
    जम्मू नगर जम्मू प्रांत का सबसे बड़ा नगर तथा जम्मू-कश्मीर राज्य की जाड़े की राजधानी है। वहीं कश्मीर में स्थित श्रीनगर गर्मी के मौसम में राज्य की राजधानी रहती है। जम्मू और कश्मीर में जम्मू , कश्मीरलद्दाखबल्तिस्तान एवं गिलगित के क्षेत्र सम्मिलित हैं। इस राज्य का पाकिस्तान अधिकृत भाग को लेकर क्षेत्रफल 2,22,236 वर्ग कि॰मी॰ एवं उसे 1,38,124 वर्ग कि॰मी॰ है। यहाँ पर पहले हिन्दू पंडित ज्यादा संख्या में रहते थे परन्तु आप ऐसा नहीं है कश्मीर में दंगो के बाद आज की स्तिथि में  मुसलमान ज्यादा  हैं, किंतु उनकी रहन-सहन, रीति-रिवाज एवं संस्कृति पर हिंदू धर्म की पर्याप्त छाप है। कश्मीर के सीमांत क्षेत्र पाकिस्तानअफगानिस्तान, सिंक्यांग तथा तिब्बत से मिले हुए हैं। कश्मीर भारत का महत्वपूर्ण राज्य है।
                                              कश्मीर के राजा  महाराजा हरि  सिंह 
    इतिहास

    जम्मू एवं कश्मीर का टोपोग्राफिक मानचित्र

    नगीन झील

    त्रो मिरोरी झील, लद्दाख

    प्राचीनकाल में कश्मीर (महर्षि कश्यप के नाम पर) हिन्दू और बौद्ध संस्कृतियों का पालना रहा है। मध्ययुग में मुस्लिम आक्रान्ता कश्मीर पर क़ाबिज़ हो गये। कुछ मुसलमान शाह और राज्यपाल हिन्दुओं से अच्छा व्यवहार करते थे 1947 ई. में कश्मीर का विलयन भारत में हुआ। पाकिस्तान अथवा तथाकथित ‘आजाद कश्मीर सरकार’, जो पाकिस्तान की प्रत्यक्ष सहायता तथा अपेक्षा से स्थापित हुई, आक्रामक के रूप में पश्चिमी तथा उत्तरपश्चिमी सीमावर्ती क्षेत्रों में अधिकृत हुए किए हैं। भारत ने यह मामला 1 जनवरी 1948 को ही राष्ट्रसंघ में पेश किया था किंतु अभी तक निर्णय खटाई में पड़ा है। उधर लद्दाख में चीन ने भी लगभग 12,000 वर्ग मील क्षेत्र अधिकार जमा लिया है।
    आज़ादी के समय कश्मीर में पाकिस्तान ने घुसपैठ करके कश्मीर के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया। बचा हिस्सा भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर का अंग बना। हिन्दू और मुस्लिम संगठनों ने साम्प्रदायिक गठबंधन बनाने शुरु किये। साम्प्रदायिक दंगे 1931 (और उससे पहले से) से होते आ रहे थे। नेशनल कांफ़्रेस जैसी पार्टियों ने राज्य में मुस्लिम प्रतिनिधित्व पर ज़ोर दिया और उन्होंने जम्मू और लद्दाख क्षेत्रों की अनदेखी की। स्वतंत्रता के पाँच साल बाद जनसंघ से जुड़े संगठन प्रजा परिषद ने उस समय के नेता शेख अब्दुल्ला की आलोचना की। शेख अब्दुल्ला ने अपने एक भाषण में कहा कि “प्रजा परिषद भारत में एक धार्मिक शासन लाना चाहता है जहाँ मुस्लमानों के धार्मिक हित कुचल दिये जाएंगे।” उन्होने अपने भाषण में यह भी कहा कि यदि जम्मू के लोग एक अलग डोगरा राज्य चाहते हैं तो वे कश्मीरियों की तरफ़ से यह कह सकते हैं कि उन्हें इसपर कोई ऐतराज नहीं।
    जमात-ए-इस्लामी के राजनैतिक टक्कर लेने के लिए शेख अब्दुल्ला ने खुद को मुस्लिमों के हितैषी के रूप में अपनी छवि बनाई। उन्होंने जमात-ए-इस्लामी पर यह आरोप लगाया कि उसने जनता पार्टी के साथ गठबंधन बनाया है जिसके हाथ अभी भी मुस्लिमों के खून से रंगे हैं। 1977 से कश्मीर और जम्मू के बीच दूरी बढ़ती गई।
    १९८४ के चुनावों से लोगों – खासकर राजनेताओं – को ये सीख मिली कि मुस्लिम वोट एक बड़ी कुंजी है। प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के जम्मू दौरों के बाद फ़ारुख़ अब्दुल्ला तथा उनके नए साथी मौलवी मोहम्मद फ़ारुख़ (मीरवाइज़ उमर फ़ारुख़ के पिता) ने कश्मीर में खुद को मुस्लिम नेता बताने की छवि बनाई। मार्च 1987 में स्थिति यहाँ तक आ गई कि श्रीनगर में हुई एक रैली में मुस्लिम युनाईटेड फ़्रंट ने ये घोषणा की कि कश्मीर की मुस्लिम पहचान एक धर्मनिरपेक्ष देश में बची नहीं रह सकती। इधर जम्मू के लोगों ने भी एक क्षेत्रवाद को धार्मिक रूप देने का काम आरंभ किया। इसके बाद से राज्य में इस्लामिक जिहाद तथा साम्प्रदायिक हिंसा में कई लोग मारे जा चुके हैं।

    विवाद

    थिकसे मठ लद्दाख में बुद्ध प्रतिमा का चेहरा

    भारत की स्वतन्त्रता के समय महाराज हरि सिंह यहाँ के शासक थे, जो अपनी रियासत को स्वतन्त्र राज्य रखना चाहते थे। शेख़ अब्दुल्ला के नेतृत्व में मुस्लिम कॉन्फ़्रेंस (बाद में नेशनल कॉन्फ्रेंस) कश्मीर की मुख्य राजनैतिक पार्टी थी। कश्मीरी पंडित, शेख़ अब्दुल्ला और राज्य के ज़्यादातर मुसल्मान कश्मीर का भारत में ही विलय चाहते थे (क्योंकि भारत धर्मनिर्पेक्ष है)। पर पाकिस्तान को ये बर्दाश्त ही नहीं था कि कोई मुस्लिम-बहुमत प्रान्त भारत में रहे (इससे उसके दो-राष्ट्र सिद्धान्त को ठेस लगती थी)। इस लिये 1947-48 में पाकिस्तान ने कबाइली और अपनी छद्म सेना से कश्मीर में आक्रमण करवाया और क़ाफ़ी हिस्सा हथिया लिया।
    उस समय प्रधानमन्त्री जवाहरलाल नेहरू ने मोहम्मद अली जिन्नाह से विवाद जनमत-संग्रह से सुलझाने की पेशक़श की, जिसे जिन्ना ने उस समय ठुकरा दिया क्योंकि उनको अपनी सैनिक कार्रवाई पर पूरा भरोसा था। महाराजा हरि सिंह ने शेख़ अब्दुल्ला की सहमति से भारत में कुछ शर्तों के तहत विलय कर दिया। भारतीय सेना ने जब राज्य का काफ़ी हिस्सा बचा लिया था, तब इस विवाद को संयुक्त राष्ट्र में ले जाया गया। संयुक्तराष्ट्र महासभा ने उभय पक्ष के लिए दो करार (संकल्प) पारित किये :-
    • पाकिस्तान तुरन्त अपनी सेना क़ाबिज़ हिस्से से खाली करे।
    • शान्ति होने के बाद दोनों देश कश्मीर के भविष्य का निर्धारण वहाँ की जनता की चाहत के हिसाब से करें।

    भारतीय पक्ष

    • कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 47, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्याय VI के तहत यूएनएससी द्वारा पारित किया गया था, जो बाध्यकारी नहीं हैं और उनके पास कोई अनिवार्य प्रवर्तन योग्यता नहीं है। मार्च 2001 में, संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव, कोफ़ी अन्नान ने भारत और पाकिस्तान की यात्रा के दौरान टिप्पणी की थी कि कश्मीर के प्रस्ताव केवल सलाहकार सिफारिशें हैं और पूर्वी तिमोर और इराक की तुलना में उनसे तुलना करना सेब और संतरे की तुलना करना था, क्योंकि संकल्प VII के तहत पारित किए गए थे, जो इसे यूएनएससी द्वारा लागू करने योग्य बनाते हैं। 2003 में, पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने घोषणा की कि पाकिस्तान कश्मीर के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों की मांग से पीछे हटना चाहता है।
    • इसके अलावा, भारत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान 13 अगस्त 1948 के संयुक्त राष्ट्र संकल्प के तहत आवश्यक कश्मीर क्षेत्र से अपनी सेना वापस ले कर पूर्व-परिस्थितियों को पूरा करने में असफल रहा, जिसने जनमत पर चर्चा की। पाकिस्तान ने अपना अधिकृत कश्मीरी भूभाग खाली नहीं किया है, बल्कि कुटिलतापूर्वक वहाँ कबाइलियों को बसा दिया है।
    • भारत ने लगातार कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव अब पूरी तरह से अप्रासंगिक हैं और कश्मीर विवाद एक द्विपक्षीय मुद्दा है और इसे 1972 के शिमला समझौता और 1999 लाहौर घोषणा के तहत हल किया जाना है।
    • 1948-49 संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को अब लागू नहीं किया जा सकता है, भारत के अनुसार, मूल क्षेत्र में बदलावों के कारण, कुछ हिस्सों के साथ “पाकिस्तान द्वारा चीन को सौंप दिया गया है और आजाद कश्मीर और उत्तरी क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन हुए हैं। “
    • जम्मू और कश्मीर की लोकतान्त्रिक और निर्वाचित संविधान-सभा ने 1957 में एकमत से ‘महाराजा द्वारा कश्मीर के भारत में विलय के निर्णय’ को स्वीकृति दे दी और राज्य का ऐसा संविधान स्वीकार किया जिसमें कश्मीर के भारत में स्थायी विलय को मान्यता दी गयी थी। (पाकिस्तान में लोकतंत्र का कितना सम्मान है, यह पूरा विश्व जानता है)
    • भारतीय संविधान के अन्तर्गत आज तक जम्मू कश्मीर में सम्पन्न अनेक चुनावों में कश्मीरी जनता ने वोट डालकर एक प्रकार से भारत में अपने स्थायी विलय को ही मान्यता दी है।
    • कश्मीर का भारत में विलय ब्रिटिश “भारतीय स्वातन्त्र्य अधिनियम” के तहत क़ानूनी तौर पर सही था।
    • पाकिस्तान अपनी भूमि पर आतंकवादी शिविर चला रहा है (ख़ास तौर पर 1989 से) और कश्मीरी युवकों को भारत के ख़िलाफ़ भड़का रहा है। ज़्यादातर आतंकवादी स्वयं पाकिस्तानी नागरिक या तालिबानी अफ़ग़ान ही हैं। ये और कुछ दिग्भ्रमित कश्मीरी युवक मिलकर इस्लाम के नाम पर भारत के ख़िलाफ़ छेड़े हुए हैं।
    • राज्य को संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत स्वायत्तता प्राप्त है।

    भारतीय संविधान में जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति

    भारत के संवैधानिक प्रावधान स्वतः जम्मू तथा कश्मीर पर लागू नहीं होते। केवल वही प्रावधान जिनमें स्पष्ट रूप से कहा जाए कि वे जम्मू कश्मीर पर लागू होंगे, उस पर लागू होते हैं। जम्मू कश्मीर की विशेष स्थिति का ज्ञान इन तथ्यों से होता है-
    1. जम्मू कश्मीर संविधान सभा द्वारा निर्मित राज्य संविधान से वहाँ का कार्य चलता है। यह संविधान जम्मू कश्मीर के लोगों को राज्य की नागरिकता भी देता है। केवल इस राज्य के नागरिक ही संपत्ति खरीद सकते हैं या चुनाव लड़ सकते हैं या सरकारी सेवा ले सकते हैं।
    2. भारतीय संसद जम्मू कश्मीर से संबंध रखने वाला ऐसा कोई कानून नहीं बना सकती है जो इसकी राज्य सूची का विषय हो।
    3. अवशेष शक्ति जम्मू कश्मीर विधान सभा के पास होती है।
    4. इस राज्य पर सशस्त्र विद्रोह की दशा में या वित्तीय संकट की दशा में आपात काल लागू नहीं होता है।
    5. भारतीय संसद राज्य का नाम क्षेत्र सीमा बिना राज्य विधायिका की स्वीकृति के नहीं बदलेगी।
    6. राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति राज्य मुख्यमंत्री की सलाह के बाद करेंगे।
    7. संसद द्वारा पारित निवारक निरोध नियम राज्य पर अपने आप लागू नहीं होगा।
    8. राज्य की पृथक दंड संहिता तथा दंड प्रक्रिया संहिता है।

    भूगोल 

    वैष्णो देवी भवन

    तिक्से गोम्पा

    हरमुख पर्वत

    कश्मीर के अधिकांश क्षेत्र पर्वतीय हैं। केवल दक्षिण-पश्चिम में पंजाब के मैदानों का क्रम चला आया है। कश्मीर क्षेत्र की प्रधानतया दो विशाल पर्वतश्रेणियाँ हैं। सुदूर उत्तर में काराकोरम तथा दक्षिण में हिमालय जास्कर श्रेणियाँ हैं जिनके मध्य सिंधु नदी की सँकरी घाटी समाविष्ट है। हिमालय की प्रमुख श्रेणी की दक्षिणी ढाल की ओर संसारप्रसिद्ध कश्मीर की घाटी है जो दूसरी ओर पीर पंजाल की पर्वतश्रेणी से घिरी हुई है। पीर पंजाल पर्वत का क्रम दक्षिण में पंजाब की सीमावर्ती नीची तथा अत्यधिक विदीर्ण तृतीय युगीन पहाड़ियों तक चला गया है।
    प्राकृतिक दृष्टि से कश्मीर को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है :
    1. जम्मू क्षेत्र की बाह्य पहाड़ियाँ तथा मध्यवर्ती पर्वतश्रेणियाँ,
    2. कश्मीर घाटी,
    3. सुदूर बृहत्‌ मध्य पर्वतश्रेणियाँ जिनमें लद्दाख, बल्तिस्तान एवं गिलगित के क्षेत्र सम्मिलित हैं।
    कश्मीर का अधिकांश भाग चिनावझेलम तथा सिंधु नदी की घाटियों में स्थित है। केवल मुज़ताघ तथा कराकोरम पर्वतों के उत्तर तथा उत्तर-पूर्व के निर्जन तथा अधिकांश अज्ञात क्षेत्रों का जल मध्य एशिया की ओर प्रवाहित होता है। लगभग तीन चौथाई क्षेत्र केवल सिंधु नदी की घाटी में स्थित है। जम्मू के पश्चिम का कुछ भाग रावी नदी की घाटी में पड़ता है। पंजाब के समतल मैदान का थोड़ा सा उत्तरी भाग जम्मू प्रांत में चला आया है। चिनाव घाटी में किश्तवाड़ तथा भद्रवाह के ऊँचे पठार एवं नीची पहाडियाँ (कंडी) और मैदानी भाग पड़ते हैं। झेलम की घाटी में कश्मीर घाटी, निकटवर्ती पहाड़ियाँ एवं उनके मध्य स्थित सँकरी घाटियाँ तथा बारामूला-किशनगंगा की संकुचित घाटी का निकटवर्ती भाग सम्मिलित है। सिंधु नदी की घाटी में ज़ास्कर तथा रुपशू सहित लद्दाख क्षेत्र, बल्तिस्तान, अस्तोद एवं गिलगित क्षेत्र पड़ते हैं। उत्तर के अर्धवृत्ताकार पहाड़ी क्षेत्र में बहुत से ऊँचे दर्रे हैं। उसके निकट ही नंगा पर्वत (26,182 फुट) है। पंजाल पर्वत का उच्चतम शिखर 15,523 फुट ऊँचा है।
    झेलम या बिहत, वैदिक काल में ‘वितस्ता‘ तथा यूनानी इतिहासकारों एवं भूगोलवेत्ताओं के ग्रंथों में ‘हाईडसपीस’ के नाम से प्रसिद्ध है। यह नदी वेरिनाग से निकलकर कश्मीरघाटी से होती हुई बारामूला तक का 75 मील का प्रवाहमार्ग पूरा करती है। इसके तट पर अनंतनाग, श्रीनगर तथा बारामूला जैसे प्रसिद्ध नगर स्थित हैं। राजतरंगिणी के वर्णन से पता चलता है कि प्राचीन काल में कश्मीर एक बृहत्‌ झील था जिसे ब्रह्मासुत मारीचि के पुत्र कश्यप ऋषि ने बारामूला की निकटवर्ती पहाड़ियों को काटकर प्रवाहित कर दिया। इस क्षेत्र के निवासी नागा, गांधारी, खासा तथा द्रादी कहलाते थे। खासा जाति के नाम पर ही कश्मीर (खसमीर) का नामकरण हुआ है, परीपंजाल तथा हिमालय की प्रमुख पर्वतश्रेणियों के मध्य स्थित क्षेत्र को कश्मीर घाटी कहते हैं। यह लगभग 85 मील लंबा तथा 25 मील चौड़ा बृहत्‌ क्षेत्र है। इस घाटी में चबूतरे के समान कुछ ऊँचे समतल क्षेत्र मिलते हैं जिन्हें करेवा कहते हैं। धरातलीय दृष्टि से ये क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
    कश्मीर घाटी में जल की बहुलता है। अनेक नदी नालों और सरोवरों के अतिरिक्त कई झीलें हैं। वुलर मीठे पानी की भारतवर्ष में विशालतम झील है। कश्मीर में सर्वाधिक मछलियाँ इसी झील से प्राप्त होती हैं। स्वच्छ जल से परिपूर्ण डल झील तैराकी तथा नौकाविहार के लिए अत्यंत रमणीक है। तैरते हुए छोटे-छोटे खत सब्जियाँ उगाने के व्यवसाय में बड़ा महत्व रखते हैं। कश्मीर अपनी अनुपम सुषमा के कारण नंदनवन कहलाता है। भारतीय कवियों ने सदा इसकी सुंदरता का बखान किया है।
    पीरपंजाल की श्रेणियाँ दक्षिण-पश्चिमी मानसून को बहुत कुछ रोक लेती हैं, किंतु कभी-कभी मानसूनी हवाएँ घाटी में पहुँचकर घनघोर वर्षा करती हैं। अधिकांश वर्षा वसंत ऋतु में होती है। वर्षा ऋतु में लगभग 9.7फ़फ़ तथा जनवरी-मार्च में 8.1फ़फ़ वर्षा होती है। भूमध्यसागरी चक्रवातों के कारण हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र में, विशेषतया पश्चिमी भाग में, खूब हिमपात होता है। हिमपात अक्टूबर से मार्च तक होता रहता है। भारत तथा समीपवर्ती देशों में कश्मीर तुल्य स्वास्थ्यकर क्षेत्र कहीं नहीं है। पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण यहाँ की जलवायु तथा वनस्पतियाँ भी पर्वतीय हैं।
    कश्मीर घाटी की प्रसिद्ध फसल चावल है जो यहाँ के निवासियों का मुख्य भोजन है। मक्का, गेहूँ, जौ और जई भी क्रमानुसार मुख्य फसलें हैं। इनके अतिरिक्त विभिन्न फल एवं सब्जियाँ यहाँ उगाई जाती हैं। अखरोट, बादाम, नाशपाती, सेब, केसर, तथा मधु आदि का प्रचुर मात्रा में निर्यात होता है। कश्मीर केसर की कृषि के लिए प्रसिद्ध है। शिवालिक तथा मरी क्षेत्र में कृषि कम होती है। दून क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर अच्छी कृषि होती है। जनवरी और फरवरी में कोई कृषि कार्य नहीं होता। यहाँ की झीलों का बड़ा महत्व है। उनसे मछली, हरी खाद, सिंघाड़े, कमल एवं मृणाल तथा तैरते हुए बगीचों से सब्जियाँ उपलब्ध होती हैं। कश्मीर की मदिरा मुगल बादशाह बाबर तथा जहाँगीर की बड़ी प्रिय थी किंतु अब उसकी इतनी प्रसिद्धि नहीं रही। कृषि के अतिरिक्त, रेशम के कीड़े तथा भेड़ बकरी पालने का कार्य भी यहाँ पर होता है।
    इस राज्य में प्रचुर खनिज साधन हैं किंतु अधिकांश अविकसित हैं। कोयला, जस्ता, ताँबा, सीसा, बाक्साइट, सज्जी, चूना पत्थर, खड़िया मिट्टी, स्लेट, चीनी मिट्टी, अदह (ऐसबेस्टस) आदि तथा बहुमूल्य पदार्थों में सोना, नीलम आदि यहाँ के प्रमुख खनिज हैं।
    श्रीनगर का प्रमुख उद्योग कश्मीरी शाल की बुनाई है जो बाबर के समय से ही चली आ रही है। कश्मीरी कालीन भी प्रसिद्ध औद्योगिक उत्पादन है। किंतु आजकल रेशम उद्योग सर्वप्रमुख प्रगतिशील धंधा हो गया है। चाँदी का काम, लकड़ी की नक्काशी तथा पाप्ये-माशे यहाँ के प्रमुख उद्योग हैं। पर्यटन उद्योग कश्मीर का प्रमुख धंधा है जिससे राज्य को बड़ी आय होती है। लगभग एक दर्जन औद्योगिक संस्थान स्थापित हुए हैं परंतु प्रचुर औद्योगिक क्षमता के होते हुए भी बड़े उद्योगों का विकास अभी तक नहीं हो पाया है।
    पर्वतीय धरातल होने के कारण यातायात के साधन अविकसित हैं। पहले बनिहाल दर्रे (9,290 फुट) से होकर जाड़े में मोटरें नहीं चलती थीं किंतु दिसंबर, 1956 ई. में बनिहाल सुरंग के पूर्ण हो जाने के बाद वर्ष भर निरंतर यातायात संभव हो गया है। पठानकोट द्वारा श्रीनगर का नई दिल्ली से नियमित हवाई संबंध है। अब पठानकोट से जम्मू तक रेल की भी सुविधा हो गई है। लेह तक भी जीप के चलने योग्य सड़क निर्मित हो गई है। वहाँ भी एक हवाई अड्डा है।
    समुद्रतल से 5,200 फुट की ऊँचाई पर स्थित श्रीनगर जम्मू-कश्मीर की राजधानी तथा राज्य का सबसे बड़ा नगर है। इस नगर की स्थापना सम्राट् अशोकवर्धन ने की थी। यह झेलम नदी के दोनों तट पर बसा हुआ है। डल झील तथा शालीमार, निशात आदि रमणीक बागों के कारण इस नगर की शोभा द्विगुणित हो गई है। अत: इसकी गणना एशिया के सर्वाधिक सुंदर नगरों में होती है। अग्निकांड, बाढ़ तथा भूकंप आदि से इस नगर को अपार क्षति उठानी पड़ती है। यहाँ के उद्योग धंधे राजकीय हैं। कश्मीर घाटी तथा श्रीनगर का महत्व इसलिए भी अधिक है कि हिमालय के पार जानेवाले रास्तों के लिए ये प्रमुख पड़ाव हैं।
    सिंधु-कोहिस्तान क्षेत्र में नंगा पर्वत संसार के सर्वाधिक प्रभावशाली पर्वतों में से एक है। सिंधु के उस पार गिललित का क्षेत्र पड़ता है। रूसी प्रभावक्षेत्र से भारत को दूर रखने के हेतु अंग्रेजी सरकार ने कश्मीर के उत्तर में एक सँकरा क्षेत्र अफगानिस्तान के अधिकार में छोड़ दिया था। गिलगित तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में जनसंख्या बहुत कम है। गिलगित से चारों ओर पर्वतीय मार्ग जाते हैं। यहाँ पर्वतक्षेत्रीय फसलें तथा सब्जियाँ उत्पन्न की जाती हैं। बृहत्‌ हिमालय तथा ज़ास्कर पर्वत-श्रेणियों के क्षेत्र में जनसंख्या कम तथा घुमक्कड़ी है। 15,000 फुट ऊँचाई पर स्थित कोर्जोक नामक स्थान संसार का उच्चतम कृषकग्राम माना जाता है। लद्दाख एवं बल्तिस्तान क्षेत्र में लकड़ी तथा ईधंन की सर्वाधिक आवश्यकता रहती है। बल्तिस्तान में अधिकांशत: मुसलमानों तथा लद्दाख में बौद्धों का निवास है। अधिकांश लोग घुमक्कड़ों का जीवन यापन करते हैं। इन क्षेत्रों का जीवन बड़ा कठोर है। कराकोरम क्षेत्र में श्योक से हुंजा तक के छोटे से भाग में 24,000 फुट से ऊँचे 33 पर्वतशिखर वर्तमान हैं। अत: उक्त क्षेत्र को ही, न कि पामीर को, ‘संसार की छत’ मानना चाहिए। अनेक कठिनाइयों से भरे इन क्षेत्रों से किसी समय तीर्थयात्रा के प्रमुख मार्ग गुजरते थे।

    भूभाग का वर्गीकरण

    भारतीय प्रशासित जम्मू और कश्मीर

    भारतीय जम्मू और कश्मीर राज्य के तीन मुख्य अंचल हैं : जम्मू (हिन्दू बहुल), कश्मीर (मुस्लिम बहुल) और लद्दाख़ (बौद्ध बहुल)। प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर है और शीतकालीन राजधानी जम्मू-तवी। कश्मीर को ‘दुनिया का स्वर्ग‘ माना गया है। अधिकांश जिले हिमालय पर्वत से ढके हुए हैं। मुख्य नदियाँ हैं सिन्धुझेलम और चेनाब। यहाँ कई ख़ूबसूरत झीलें हैं जैसे: डलवुलर और नगीन
    ये लेख सिर्फ आपको जानकारी देने के लिए है किसी वर्ग , जाति , व समूह को हानि पहुंचाने के लिए नहीं |   
  • क्या आप मुरादाबाद का इतिहास जानते हो ?

    क्या आप मुरादाबाद का इतिहास जानते  हो ?


    मुरादाबाद भारत के उत्तर प्रदेश प्रान्त का एक नगर है जो कि पीतल हस्तशिल्प के निर्यात के लिए प्रसिद्ध है। रामगंगा नदी के तट पर स्थित मुरादाबाद पीतल पर की गई हस्तशिल्प के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। इसका निर्यात केवल भारत में ही नहीं अपितु अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, जर्मनी और मध्य पूर्व एशिया आदि देशों में भी किया जाता है। अमरोहागजरौला और तिगरी आदि यहाँ के प्रमुख पयर्टन स्थलों में से हैं। रामगंगा और गंगा यहाँ की दो प्रमुख नदियाँ हैं। मुरादाबाद विशेष रूप से प्राचीन समय की हस्तकला, पीतल के उत्पादों पर की रचनात्मकता और हॉर्न हैंडीक्राफ्ट के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध है। यह जिला बिजनौर जिला के उत्तर, बदायूँ जिला के दक्षिण, रामपुर जिला के पूर्व और अमरोहा  जिला के पश्चिम से घिरा हुआ है।


    इतिहास

    1624 ई. में सम्भल के गर्वनर रुस्तम खान ने मुरादाबाद शहर पर कब्जा कर लिया था और इस जगह पर एक किले का निर्माण करवाया था। उनके नाम पर इस जगह का नाम रुस्तम खान रखा गया। इसके कुछ समय बाद  मुरादाबाद शहर की स्थापना मुगल शासक शाहजहाँ के पुत्र मुराद बख्श ने की थी। अत: उसके नाम पर इस जगह का नाम मुरादाबाद रख दिया गया। तब से ये मुरादाबाद ही  है | 

    कृषि और उद्योग

    पीतल की बर्तन 
    प्रमुख सड़क और रेल जंक्शन पर स्थित यह शहर कृषि उत्पादों का व्यापार केंद्र है। कृषि वस्तुओं के व्यापार का प्रमुख केन्द्र है। कलई किए गए पीतल के बर्तनों के लिए यह नगर प्रसिद्ध है। यहाँ पर कुछ चीनी व कपड़े की मिलें भी हैं। यहाँ के उद्योगों में कपास मिल, बुनाई, धातुकर्म, इलेक्ट्रोप्लेटिंग और छपाई उद्योग शामिल हैं। यहाँ अनाज, कपास और गन्ने की खेती होती है। चीनी मिल और सूती वस्त्र निर्माण यहाँ के प्रमुख उद्योग हैं।

    प्रमुख आकर्षण

    मुरादाबाद में तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी ,जिसमे रोजाना १००० से ज्यादा मरीज आते  है। इसके अलावा प्रेम वाटर किंगडम घूमने के लिए उपयुक्त जगह है एवं यहाँ पर हाफिज साहब का मजार भी देखने योग्य है जो रामगंगा नदी के किनारे पर स्थित है।

    खरीदारी

    पीतल का एक सजावटी पेपरवेट

    मुरादाबाद में खरीदारी किए बिना आपका सफर अधूरा ही रहेगा। मुरादाबाद स्थित मुख्य बाजार पीतल मंडी है। इस जगह पर कई सौ छोटी और बड़ी दुकानें है जहां तांबा और कांसा की ब्रिकी की जाती है। इन छोटी-छोटी दुकानों से जहां आप तांबा और कांसे से बनी खूबसूरत वस्तुओं की खरीदारी कर सकते हैं वहीं दूसरी ओर बड़ी दुकानों से बेशकिमती और आकर्षक वस्तुओं खरीद सकते हैं। यहां आपको तांबे के आइटम सभी साइज और शेप में मिल जाएंगे। उन पर की खूबसूरत नक्काशी का काम देखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त यहां जिस चीज की बिक्री सबसे अधिक होती है वह इत्रदान और गुलाबपाश है। यह इत्रदान और गुलाबपाश आपको हर शेप में विशेष रूप से कांसे और तांबे के मिश्रण से बने बर्तन में आसानी से मिल जाएंगे। इसके साथ-साथ अफताब अथवा वाइन सर्वर की खरीदारी भी जरूर करें। इन पर तांबे की लाइंनिग का काम हुआ होता है और इसका भार भी अधिक होता है।
  • 100 % नंबर देने पर क्या एग्जाम सिस्टम पर सवाल उठाना सही है ?

    100 % नंबर देने पर क्या एग्जाम सिस्टम पर सवाल उठाना सही है ?

    भूपेंद्र प्रकाश शर्मा , मुरादाबाद 

    CISCE (काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस) के 10वीं और 12वीं के रिजल्ट मंगलवार को घोषित हुए। 12वीं में 2 छात्रों ने सभी विषयों में 100 प्रतिशत मार्क्स हासिल किए लेकिन विशेषज्ञों ने बोर्ड एग्जाम्स में हाई स्कोर के ट्रेंड को लेकर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है एजुकेशन सिस्टम में विचारों की मौलिकता और रचनात्मकता के बजाय अंकों पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। इससे 4 दिन पहले ही, सीबीएसई के 12वीं के 2 स्टूडेंट महज एक अंक से पर्फेक्ट 100 से चूक गए थे। इसी तरह, सीबीएसई के 10वीं के रिजल्ट में 13 स्टूडेंट ने संयुक्त रूप से टॉप किया था, जो सिर्फ 1 अंक से पर्फेक्ट 100 से चूके थे। रैंक 2 पर 498 अंकों के साथ 24 बच्चे थे और तीसरे स्थान 497 मार्क्स के साथ 58 बच्चे थे। इसके अलावा 57,256 स्टूडेंट्स ने 95 प्रतिशत या इससे ज्यादा अंक हासिल किए थे। 



    NCERT (नैशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनशनल रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग) के पूर्व डायरेक्टर कृष्णा कुमार ने  बताया, ‘100 प्रतिशत स्कोर के ट्रेंड का एजुकेशन बोर्डों की मार्किंग में उदारता से कुछ लेना-देना नहीं है। समस्या इसमें है कि कि प्रश्न कैसे सेट किए जाते हैं और उनके लिए मॉडल आन्सर कैसे तैयार किए जाते हैं। ये मॉडल आन्सर ऐसे हैं कि स्टूडेंट फुल मार्क पाने के लिए उन उत्तरों को पूरी तरह दोबारा लिख सकते हैं। जो स्टूडेंट थोड़े मौलिक और रचनात्मक हैं, उन्हें इस प्रक्रिया में नुकसान पहुंच रहा है। एक पुरानी कहावत भी है, यह तोता रटंतों की जीत है।’ उन्होंने कहा कि इस समस्या का हल बेहतर प्रश्न पत्र और उनके लिए मॉडल आन्सर तैयार करना है। 

    ‘मैं हाई मार्क्स पाने वाले स्टूडेंट्स के प्रदर्शन और उनकी काबिलियत पर शक नहीं कर रहा हूं।’ सीबीएसई के सबसे लंबे वक्त तक चेयरपर्सन रहे गांगुली को एक और दुख है। वह कहते हैं, ‘हम टॉपरों की पहचान क्यों कर रहे हैं? यह स्कूल और बोर्डों में स्टूडेंट्स के बीच गैरजरूरी होड़ को बढ़ावा दे रहा है। इसे रोकने की जरूरत है। हमने 10 साल पहले इसे रोका था लेकिन अब यह फिर शुरू हो गया है।’ 
  • 5G से क्या हमारे जीवन को खतरा हो सकता है ?

    5G से क्या हमारे जीवन को खतरा हो सकता है ?

    नीदरलैंड में 5G से गई सैकड़ों पक्षियों की जान, अक्षय कुमार की 2.0 का खतरा हुआ सच साबित| भारत में 2019 की पहली तिमाही में नई दिल्ली में 5G सेवा का ट्रायल किया जाएगा. लेकिन नीदरलैंड में 5जी सर्विस की टेस्टिंग से जुड़ी एक खबर ने सबको चौंका दिया है. पक्षियों के लिए इसकी टेस्टिंग काल बनकर आई और करीब 300 बेजुबानों की जान चली गई. ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं क्या भारत भी इस रिपोर्ट से कोई सबक लेगा
    रेडियो, सेल टॉवर्स और सैटेलाइट रेडियो फ्रीक्वेंसी कम्यूनिकेट करने के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल करते हैं। फ्रीक्वेंसी को Hz से मापा जाता है और रेडियो फ्रीक्वेंसी को GHz रेंज से मापा जाता है। कुछ समय पहले आई रिपोर्ट्स में बताया गया था कि 5जी नेटवर्क पर डाटा 6 GHz से ट्रांसमिट किया जाएगा। आपको बता दें कि यह रेडियो फ्रीक्वेंसी रेंज सैटेलाइट लिंक जैसे अन्य सिग्नल से पहले ही भरा हुआ है ऐसे में इसके पास दूसरे सिग्नल्स के लिए जगह नहीं है। आसान भाषा में समझा जाए तो रेडियो फ्रीक्वेंसी भी 5जी के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकती है। क्योंकि 5जी को सैटेलाइट सिग्नल मिलने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
    हालांकि, अभी 5जी तकनीक के रोलआउट होने में काफी समय है। ऐसे में अभी इसके बारे में काफी जानकारी सामने आ सकती हैं। नए जनरेशन के इस नेटवर्क में कुछ न कुछ खूबियां और खामियां हैं। लेकिन जब तक यह तकनीक लॉन्च नहीं हो जाती है। तब तक इसके बारे में स्पष्ट रूप से कहना ठीक नहीं होगा।