Aapki Chopal News

  • मुरादाबाद पुलिस में बड़ा फेरबदल, 6 निरीक्षकों का हुआ स्थानांतरण

    आपकी चौपाल न्यूज

    मुरादाबाद,। मुरादाबाद जनपद में प्रशासनिक समायोजन और कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 6 निरीक्षकों के तबादले किए गए हैं। जारी आदेश के अनुसार, संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नवीन तैनाती स्थलों पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

    स्थानांतरित अधिकारियों में प्रमुख रूप से शामिल हैं:

    निरीक्षक योगेन्द्र कुमार सिंह, थाना डिलारी से हटाकर वाचक व०पु ०अ० बनाए गए।

    निरीक्षक मनोज कुमार, पुलिस लाइन से स्थानांतरित होकर थाना डिलारी पहुंचे।

    निरीक्षक जसपाल सिंह ग्वाल, थाना कोतवाली से थाना ठाकुरद्वारा में तैनात किए गए।

    निरीक्षक विवेक शर्मा, प्रभारी निरीक्षकथाना ठाकुरद्वारा से प्रभारी निरीक्षक थाना कांठ स्थानांतरित।

    निरीक्षक बृजेंद्र सिंह, प्रभारी निरीक्षक थाना कांठ से प्रभारी निरीक्षक थाना कोतवाली भेजे गए।

    निरीक्षक सर्वेन्द्र कुमार शर्मा, प्रभारी निरीक्षक सोनकपुर से हटाकर वीआईपी सेल में भेजे गए।

    उप निरीक्षक सतेंद्र सिंह उज्ज्वल, एसएसआई थाना कटघर से थाना थानाध्यक्ष सोनकपुर में नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

    मोहित गुप्ता मुरादाबाद

  • आज का हिन्दू पंचांग दिनांक – 13 मई 2025

    दिन – मंगलवार

    विक्रम संवत् – 2082

    ⛅अयन – उत्तरायण

    ⛅ऋतु – ग्रीष्म

    ⛅मास – ज्येष्ठ

    ⛅पक्ष – कृष्ण

    ⛅तिथि – प्रतिपदा रात्रि 12:35 मई 14 तक तत्पश्चात् द्वितीया

    ⛅नक्षत्र – विशाखा सुबह 09:09 तक तत्पश्चात् अनुराधा

    ⛅योग – परिघ पूर्ण रात्रि तक

    ⛅राहुकाल – दोपहर 03:54 से शाम 05:34 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)

    ⛅सूर्योदय – 06:00

    ⛅सूर्यास्त – 07:13 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त अहमदाबाद मानक समयानुसार)

    ⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में

    ⛅ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 04:33 से प्रातः 05:16 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)

    ⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:10 से दोपहर 01:03 तक

    ⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:14 मई 14 से रात्रि 12:57 मई 14 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)

    ⛅व्रत पर्व विवरण – नारदजी जयंती

    ⛅विशेष – प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाएं, क्योंकि यह धन का नाश करने वाला होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)

    🔹गर्मी के प्रभाव से सुरक्षा हेतु – प्रकृति के उपहार🔹

    🥥नारियल पानी :-  नारियल का पानी पित्तशामक, स्वादिष्ट, स्निग्ध और ताजगी प्रदान करनेवाला है । यह प्यास को शांत कर ग्रीष्म ऋतु की उष्णता से सुरक्षा करता है । अत: गर्मियों में नारियल पानी का सेवन विशेष लाभदायी है ।

    🔸लू लगने पर नारियल पानी के साथ काला जीरा पीस के शरीर पर लेप करने से लाभ होता है ।

    🔸प्रतिदिन नारियल खाने व नारियल पानी पीने से शारीरिक शक्ति का विकास होता है, वीर्य की तेजी से वृद्धि होती है । ( अष्टमी को नारियल न खायें । )

    🔸मूत्र में जलन होने पर पिसा हरा धनिया तथा मिश्री नारियल पानी में मिला के पीने से जलन दूर होती है ।

    🥒खीरा : –  खीरा शरीर को शीतलता प्रदान करता है । इसमें बड़ी मात्रा में पानी और खनिज तत्त्व पाये जाते हैं ।

    अत: इसके सेवन से शरीर में खनिज तत्त्वों का संतुलन बना रहता हैं । यह मूत्र की जलन शांत करता है एवं यकृत ( लीवर ) के लिए भी हितकारी है । खीरा भूख बढाने के साथ ही आँतों को सक्रिय करता हैं ।

    🔸अधिक पढने – लिखने, चित्रकला, संगणक व सिलाई का काम करने से आँखों में थकावट होने पर खीरे के दुकड़े काटकर आँखों पर रखें । इससे उनको आराम मिलता है तथा थकावट दूर होती है ।

    🍋नींबू और खीरे 🥒 का रस मिलाकर लगाने से धूप से झुलसी हुई त्वचा ठीक होती है ।

    🍉तरबूज :- ग्रीष्म ऋतुमें प्यास की अधिकता से मुक्ति दिलाता है तरबूज । इसके सेवन से शरीर में लू का प्रकोप कम होता है और बेचैनी से रक्षा होती है ।

    तरबूज के रस में सेंधा नमक और नींबू का रस मिलाकर पीने से लू से सुरक्षा होती है ।

    🔸गर्मी के प्रकोप से मूत्रावरोध होने पर तरबूज का रस पिलाने से मूत्र शीघ्र निष्कासित होता है ।

    🔸तरबूज के छोटे – छोटे टुकड़ों पर थोडा – सा  जीरा चूर्ण और मिश्री डाल के सेवन करने से शरीर की उष्णता दूर होती है ।

    ☘️धनिया : – धनिया ग्रीष्म ऋतू में अधिक प्यास के प्रकोप को शांत करता है ।

    🔸१० ग्राम सूखा धनिया व ५ ग्राम आँवला चूर्ण रात को मिटटी के पात्र में  १ गिलास पानी में भिगो दें । प्रात: मसलकर मिश्री मिला के छान के पियें । यह गर्मी के कारण होनेवाले सिरदर्द व मूँह के छालों में हितकर हैं । धनिया पीसकर सिर पर लेप करने से भी आशातीत लाभ होगा । इससे पेशाब की जलन, गर्मी के कारण चक्कर आना तथा उलटी होना आदि समस्याएँ दूर होती हैं ।

  • आपको हमेशा स्वस्थ रखेंगी ये 5 हेल्थ टिप्स

    योग विज्ञान से सीखें 5 हेल्थ टिप्स – सेहत और स्वास्थ के लिए कुछ सरल हेल्थ टिप्स। भारतीय संस्कृति में जीने के कुछ ऐसे तौर-तरीके हैं जिनका हम कई पीढ़ियों से पालन करते आ रहे हैं, जैसे – उपवास करना, उठने और बैठने के ढंग, और पानी भरकर रखने के लिए तांबे के बर्तनों का प्रयोग…जानते हैं इन टिप्स के बारे में।

    1. तांबे के बर्तन का पानी पीयें

    तांबे के बैक्टीरिया-नाशक गुणों में मेडिकल साईंस बड़ी गहरी रुचि ले रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कई प्रयोग हुए हैं और वैज्ञानिकों ने यह मालूम किया है कि पानी की अपनी याददाश्त होती है – यह हर उस चीज को याद रखता है जिसको यह छूता है। पानी की अपनी स्मरण-शक्ति होने के कारण हम इस बात पर ध्यान देते हैं कि उसको कैसे बर्तन में रखें।

    अगर आप पानी को रात भर या कम-से-कम चार घंटे तक तांबे के बर्तन में रखें तो यह कुछ गुण अपने में समा लेता है।

    यह पानी खास तौर पर आपके लीवर के लिए और आम तौर पर आपकी सेहत और शक्ति-स्फूर्ति के लिए उत्तम होता है। अगर पानी बड़ी तेजी के साथ पंप हो कर अनगिनत मोड़ों के चक्कर लगाकर लोहे या प्लास्टिक की पाइप के सहारे आपके घर तक पहुंचता है तो इन सब मोड़ों से रगड़ाते-टकराते गुजरने के कारण उसमें काफ़ी दोष आ जाता है। लेकिन पानी में याद्दाश्त के साथ-साथ अपने मूल रूप में वापस पहुंच पाने की शक्ति भी होती है। अगर आप नल के इस पानी को एक घंटे तक बिना हिलाये-डुलाये रख देते हैं तो दोष अपने-आप खत्म हो जाता है।

    2. शरीर को नींद नहीं, आराम दें

    आप सोने किस वक्त जाते हैं, यह तो आपके लाइफ स्टाइल पर निर्भर करता है, लेकिन महत्व इस बात का है कि आपको कितने घंटे की नींद की जरूरत है। अकसर कहा जाता है कि दिन में आठ घंटे की नींद लेनी ही चाहिए। आपके शरीर को जिस चीज की जरूरत है, वह नींद नहीं है, वह आराम है। अगर आप पूरे दिन अपने शरीर को आराम दें, अगर आपका काम, आपकी एक्सरसाइज सब कुछ आपके लिए एक आराम की तरह हैं तो अपने आप ही आपकी नींद के घंटे कम हो जाएंगे। लोग हर चीज तनाव में करना चाहते हैं। मैंने देखा है कि लोग पार्क में टहलते वक्त भी तनाव में होते हैं। अब इस तरह का व्यायाम तो आपको फायदे की बजाय नुकसान ही करेगा, क्योंकि आप हर चीज को इस तरह से ले रहे हैं जैसे कोई जंग लड़ रहे हों। आप आराम के साथ क्यों नहीं टहलते? चाहे टहलना हो या जॉगिंग, उसे पूरी मस्ती और आराम के साथ क्यों नहीं कर सकते?तो सवाल घूमफिर कर वही आता है कि मेरे शरीर को कितनी नींद की जरूरत है? यह इस बात पर निर्भर है कि आप किस तरह का शारीरिक श्रम करते हैं। आपको न तो भोजन की मात्रा तय करने की जरूरत है और न ही नींद के घंटे। मुझे इतनी कैलरी ही लेनी है, मुझे इतने घंटे की नींद ही लेनी है, जीवन जीने के लिए ये सब बेकार की बातें हैं। आज आप जो शारीरिक श्रम कर रहे हैं, उसका स्तर कम है, तो आप कम खाएं। कल अगर आपको ज्यादा काम करना है तो आप ज्यादा खाएं। नींद के साथ भी ऐसा ही है। जिस वक्त आपके शरीर को पूरा आराम मिल जाएगा, यह उठ जाएगा चाहे सुबह के 3 बजे हों या 8। आपका शरीर अलार्म की घंटी बजने पर नहीं उठना चाहिए। एक बार अगर शरीर आराम कर ले तो उसे खुद ही जग जाना चाहिए।

    3. दो हफ्ते में एक बार उपवास करें

    आप शरीर के प्राकृतिक चक्र से जुड़ा ‘मंडल’ नाम की एक चीज होती है। मंडल का मतलब है कि हर 40 से 48 दिनों में शरीर एक खास चक्र से गुजरता है।

    हर चक्र में तीन दिन ऐसे होते हैं जिनमें आपके शरीर को भोजन की आवश्यकता नहीं होती। अगर आप अपने शरीर को लेकर सजग हो जाएंगे तो आपको खुद भी इस बात का अहसास हो जाएगा कि इन दिनों में शरीर को भोजन की जरूरत नहीं होती। इनमें से किसी भी एक दिन आप बिना भोजन के आराम से रह सकते हैं।

    11 से 14 दिनों में एक दिन ऐसा भी आता है, जब आपका कुछ भी खाने का मन नहीं करेगा। उस दिन आपको नहीं खाना चाहिए। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि कुत्ते और बिल्लियों के अंदर भी इतनी सजगता होती है। कभी गौर से देखें, किसी खास दिन वे कुछ भी नहीं खाते। दरअसल, अपने सिस्टम के प्रति वे पूरी तरह सजग होते हैं। जिस दिन सिस्टम कहता है कि आज खाना नहीं चाहिए, वह दिन उनके लिए शरीर की सफाई का दिन बन जाता है और उस दिन वे कुछ भी नहीं खाते। अब आपके भीतर तो इतनी जागरूकता नहीं कि आप उन खास दिनों को पहचान सकें। फिर क्या किया जाए! बस इस समस्या के समाधान के लिए अपने यहां एकादशी का दिन तय कर दिया गया। हिंदी महीनों के हिसाब से देखें तो हर 14 दिनों में एक बार एकादशी आती है। इसका मतलब हुआ कि हर 14 दिनों में आप एक दिन बिना खाए रह सकते हैं। अगर आप बिना कुछ खाए रह ही नहीं सकते या आपका कामकाज ऐसा है, जिसके चलते भूखा रहना आपके वश में नहीं और भूखे रहने के लिए जिस साधना की जरूरत होती है, वह भी आपके पास नहीं है, तो आप फलाहार ले सकते हैं। कुल मिलाकर बात इतनी है कि बस अपने सिस्टम के प्रति जागरूक हो जाएं।

    एक बात और, अगर आप बार-बार चाय और कॉफ़ी पीने के आदी हैं और उपवास रखने की कोशिश करते हैं तो आपको बहुत ज्यादा दिक्कत होगी। इस समस्या का तो एक ही हल है। अगर आप उपवास रखना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने खानपान की आदतों को सुधारें। पहले सही तरह का खाना खाने की आदत डालें, तब उपवास की सोचें। अगर खाने की अपनी इच्छा को आप जबर्दस्ती रोकने की कोशिश करेंगे तो यह आपके शरीर को हानि पहुंचाएगा। यहां एक बात और बहुत महत्वपूर्ण है कि किसी भी हाल में जबर्दस्ती न की जाए।

    4. पीठ को सीधा रखकर बैठें

    शरीर के भीतरी अंगों के आराम में होने का खास महत्व है। इसके कई पहलू हैं। फिलहाल हम इसके सिर्फ एक पहलू पर विचार कर रहे हैं। शरीर के ज्यादातर महत्वपूर्ण भीतरी अंग छाती और पेट के हिस्से में होते हैं। ये सारे अंग न तो सख्त या कड़े होते हैं और न ही ये नट या बोल्ट से किसी एक जगह पर स्थिर किए गए हैं। ये सारे अंग ढीले-ढाले और एक जाली के अंदर झूल रहे से होते हैं। इन अंगों को सबसे ज्यादा आराम तभी मिल सकता है, जब आप अपनी रीढ़ को सीधा रखकर बैठने की आदत डालें।

    आधुनिक विचारों के मुताबिक, आराम का मतलब पीछे टेक लगाकर या झुककर बैठना होता है। लेकिन इस तरह बैठने से शरीर के अंगों को कभी आराम नहीं मिल पाता।

    5. पंच तत्वों से जुड़कर जीवन जीयें

    हम कुछ लोगों को बता रहे थे कि हमारे योग केंद्र में एक योगिक अस्पताल है, तो अमेरिका से कुछ डॉक्टर इसे देखना चाहते थे और वे हमारे यहां आए। वे एक हफ्ते यहां थे और एक हफ्ते के बाद वे मुझसे बहुत नाराज़ थे। मैंने कहा – “क्यों, मैंने क्या किया? वे चारों तरफ यही बातें कर रहे थे – “ये सब फ़ालतू बकवास है! सद्गुरु ने कहा यहां एक योगिक अस्पताल! कहां है योगिक अस्पताल? हमें कोई बिस्तर नहीं दिख रहे हैं, हमें कुछ नहीं दिख रहा”। फिर मुझे समझ आया कि उनकी समस्या क्या है, फिर मैंने उन्हें बुलाया और मैंने कहा – “परेशानी क्या है” उनमें से एक महिला, जिनकी आँखों में आंसू थे, बोलीं – मैं यहां इतने विश्वास के साथ आई और यहां धोखा हो रहा है, यहां कोई अस्पताल नहीं है, बिल्कुल भी कुछ नहीं यहां और आप बोल रहे हैं कि यहां अस्पताल है। मैंने कहा – “आराम से बैठिये। आपके अस्पताल के बारे में ये विचार हैं कि – बहुत से बिस्तर हों जहां मरीजों को सुला दो और उन्हें दवाइयां देते रहो – ये अस्पताल ऐसा नहीं है। मैं आपको आस-पास घुमाता हूँ – सभी मरीज़ यहां बगीचे में काम कर रहे हैं, और रसोई घर में काम कर रहे हैं। हम उनसे काम करवाते हैं, और वे ठीक हो जाते हैं।

    तो, सबसे महत्वपूर्ण चीज़ ये है कि अगर कोई बीमार हो तो हम उनसे बगीचे में काम करवाते हैं। उन्हें खाली हाथों धरती के संपर्क में कम से कम आधे घंटे से लेकर 45 मिनट तक जरुर होना होता है। ऐसा करने से वे स्वस्थ हो जाते हैं। क्योकि आप जिस चीज़ को शरीर कहते हैं वो बस इस धरती का एक टुकडा है, है न? हां या ना? वे सभी अनगिनत लोग जो इस धरती पर चले, वे सब कहां गए? सब धरती की उपरी सतह पर हैं, है न? ये शरीर भी धरती की सतह पर चला जाएगा – जब तक कि आपके दोस्त – इस डर से कि आप फिर से न जाग जाएं – आपको बहुत गहरा न दफना दें। तो, यह बस धरती का एक टुकड़ा है। तो यह अपने सर्वोत्तम रूप में तब रहेगा, जब आप धरती से थोडा संपर्क बनाकर रखें। फिलहाल आप हर वक़्त सूट और बूट पहन कर पचासवें फ्लोर पर चलते रहते हैं, और कभी भी धरती के संपर्क में नहीं आते। ऐसे में आपका शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार होना स्वाभाविक है। फिर मैंने उन्हें दिखाया – “देखो इस व्यक्ति को दिल का रोग है, उस व्यक्ति को वो बीमारी है। मैंने सभी मरीजों से उनका परिचय कराया और फिर मरीज़ अपनी बातें बताने लगे – “तीन हफ्ते पहले हम ऐसे थे, और अब हमें बहुत अच्छा लग रहा है, हम अपनी बीमारी ही भूल गए हैं।” और अब सभी मेडिकल मापदंड भी कह रहे हैं कि वे ठीक हैं। अमेरिकी डॉक्टर को यह विश्वास दिलाने में कि ये लोग सच में मरीज़ हैं हमें बहुत मेहनत करनी पड़ी। हम उन्हें अच्छे काम में भी लगा रहे हैं।

  • मोदी की कूटनीति: एक नई परिभाषा

    भारत की राजनीति और कूटनीति के इतिहास में जब-जब चुनौतियाँ आई हैं, तब-तब नेतृत्व ने अपने निर्णयों और दृष्टिकोण से दुनिया को चौंकाया है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने जिस प्रकार से कूटनीति को एक नया आयाम दिया है, वह अभूतपूर्व है। उनके नेतृत्व में भारत ने न केवल अपने दुश्मनों को करारा जवाब दिया है, बल्कि विश्व पटल पर अपनी प्रतिष्ठा भी और अधिक मजबूत की है। पाकिस्तान, जो वर्षों से भारत की शांति और अखंडता को चुनौती देता रहा है, आज मोदी की रणनीति और कूटनीति के आगे नतमस्तक होने को मजबूर है।

    भारत हमेशा से ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत में विश्वास करता आया है। हमारी संस्कृति और सभ्यता सहिष्णुता और शांति की मिसाल रही है। हमने बार-बार अपने पड़ोसियों को उनकी गलतियों के बावजूद माफ किया, इस आशा के साथ कि वे सुधरेंगे, शांति का मार्ग अपनाएंगे। लेकिन पाकिस्तान ने हर बार भारत की सहनशीलता को उसकी कमजोरी समझा। आतंकवाद को अपनी नीति का हिस्सा बनाकर उसने बार-बार भारत की संप्रभुता को चोट पहुँचाने का प्रयास किया।

    पहाड़ों से घिरे खूबसूरत पहलगाम में जब निर्दोष और निहत्थे पर्यटकों पर हमला हुआ, तब पूरे देश का दिल दहल उठा। हर भारतीय के मन में गुस्सा था। हर दिल से एक ही आवाज उठ रही थी कि अब बहुत हो चुका। अब कोई समझौता नहीं। इस दुख की घड़ी में प्रधानमंत्री मोदी सऊदी अरब के दौरे पर थे। देशवासियों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया – क्या प्रधानमंत्री दौरा रद्द कर वापस आएंगे? क्या अब कोई कड़ा कदम उठाया जाएगा? और मोदी ने वही किया, जिसकी उम्मीद एक सशक्त नेतृत्व से होती है। उन्होंने दौरा रद्द किया, वापस लौटे और तुरंत अपनी रणनीति बनाने में जुट गए।

    देश की सुरक्षा के लिए उन्होंने हर पहलू पर मंथन किया। बिहार का दौरा कर देश के जमीनी हालात को समझा, रक्षा मंत्रालय और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से गहन चर्चा की। उन्होंने विपक्ष से भी संवाद किया, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा के इस गंभीर मुद्दे पर एकजुटता बनी रहे। विपक्ष ने भी इस बार देशहित में कदम आगे बढ़ाते हुए समर्थन दिया। यह वही क्षण था जब राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखकर पूरा देश एक आवाज में बोल रहा था – दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब चाहिए।

    विश्व मंच पर भारत की छवि लगातार मजबूत होती रही। अंतरराष्ट्रीय मीडिया भारत की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थी। पाकिस्तान यह सोचकर खुश हो रहा था कि भारत सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहेगा। लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि मोदी की कूटनीति में कितनी गहराई है और भारतीय सेना की क्षमता कितनी अद्भुत। जब भारतीय सेना ने दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और सफल हमले किए, तो पाकिस्तान हक्काबक्का रह गया।

    मोदी की कूटनीति का जादू सिर्फ सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने दुनिया के शक्तिशाली देशों को भी भारत के साथ खड़ा कर दिया। अमेरिका, इजरायल, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया और अरब देशों ने खुलकर भारत के कदमों का समर्थन किया। पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलगाव की स्थिति पैदा हो गई। न केवल उसकी कूटनीतिक हार हुई, बल्कि उसके भीतर भी असंतोष की लहर दौड़ गई। नवाज शरीफ को इमरान खान जैसे विरोधियों से भी समर्थन नहीं मिला। पाकिस्तान के अंदरूनी हालात डगमगाने लगे।

    मोदी की रणनीति ने एक स्पष्ट संदेश दिया – भारत अब सहनशीलता की आड़ में कमजोरी नहीं दिखाएगा। भारत अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और नागरिकों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। उनकी कूटनीति में संतुलन है – जहाँ एक ओर उन्होंने विश्व के बड़े देशों का समर्थन पाया, वहीं दूसरी ओर पड़ोसियों के साथ शांति का मार्ग भी खुला रखा। यह संतुलन ही मोदी की सबसे बड़ी ताकत बन गई।

    आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो पाते हैं कि मोदी ने जिस धैर्य, दूरदर्शिता और साहस के साथ इस संकट का सामना किया, वह इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। उनके निर्णयों ने न केवल पाकिस्तान को उसकी औकात दिखा दी, बल्कि भारतवासियों के मन में यह विश्वास भी जगा दिया कि अब देश सुरक्षित हाथों में है।

    पाकिस्तान की हालत ऐसी हो गई कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात रखने के लिए गिड़गिड़ाने लगा। उसका कोई साथी नहीं रहा। विश्व समुदाय भारत के साथ खड़ा रहा। यह मोदी की कूटनीति की सबसे बड़ी जीत थी। उनकी रणनीति ने साबित कर दिया कि अगर नेतृत्व मजबूत हो, दूरदृष्टि से युक्त हो और देशहित को सर्वोपरि माने, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

    आज भारत न केवल एशिया बल्कि दुनिया की एक बड़ी शक्ति के रूप में उभर रहा है। मोदी की कूटनीति ने भारत को वह आत्मविश्वास दिया है, जिसकी हमें सदियों से जरूरत थी। अब कोई भारत की सहिष्णुता को कमजोरी समझने की भूल नहीं करेगा। क्योंकि अब भारत के पास एक ऐसा नेतृत्व है, जो शांति भी चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर युद्ध भी जीत सकता है।

    नरेंद्र दामोदरदास मोदी – यह नाम पाकिस्तान कभी नहीं भूल पाएगा। यह नाम भारत के इतिहास में गर्व, शौर्य और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बन चुका है। भारत आगे बढ़ रहा है, और मोदी की कूटनीति ने इस यात्रा को और भी सशक्त बना दिया है।

    उपसंपादक आपकी चौपाल न्यूज
    मोहित गुप्ता मुरादाबाद

  • Hello World!

    Welcome to WordPress! This is your first post. Edit or delete it to take the first step in your blogging journey.

  • योगी सरकार 2.0 का पहला तोहफा

    यूपी में फ्री राशन योजना तीन माह के लिए बढ़ाई गई

    योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के तुरंत बाद प्रदेश के 15 करोड़ राशन कार्डधारकों को फ्री राशन योजना को तीन माह के लिए बढ़ा दिया है। योगी आदित्यनाथ ने प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि यह योजना कोरोना काल में शुरू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य गरीबों की मदद करना है। योजना पर करीब 3270 करोड़ का खर्च आता है। उन्होंने कहा कि कैबिनेट का   है कि योजना आगे भी जारी रखी जाए ||

    आपको बता दें कि योगी व उत्तर प्रदेश सरकार की मुफ्त राशन योजना को जारी रखने के लिए खाद्य व रसद विभाग ने उतर प्रदेश शासन को प्रस्ताव भेजा था। हालांकि भेजे गए प्रस्ताव में अवधि का कोई जिक्र नहीं था, इसे सरकार की मंशा पर छोड़ दिया गया। प्रस्ताव में महंगाई के बढ़ने के कारण निशुल्क राशन देने का जिक्र है। 

    गुप्त जानकारी के मुताबिक, सरकार व खाद्य व रसद विभाग का इस बात पर मंथन चल रहा है  कि इस योजना को कब तक बढ़ाया जाए। वहीं योजना को एक साथ न बढ़ाकर दो से तीन चरणों में बढ़ाया जाए। इसमें सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून के तहत दिए जाने वाले राशन यानी गेहूं व चावल के अलावा एक लीटर तेल, एक किलो चना नमक भी देगी।

  • दिल्ली मेट्रो ने कोरोना को काबू करने को बढ़ाई सख्ती, 650 से अधिक यात्रियों के चालान काटे

     

    दिल्ली में फिर एक बार कोरोना संक्रमण ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए है इशी के मद्देनजर कोरोना पर  काबू पाने के लिए एक बार फिर दिल्ली मेट्रो रेल निगम (DMRC) ने भी अपनी तैयारियां पूरी ली है।DMRC ने तय किया है कि मेट्रो में सफर के दौरान कोविड-19 के  नियमों की अनदेखी करने वाले लोगों के चालन कैट जाएंगे, और आज 650 से अधिक लोगों के चालान काटे गए हैं। 

    DMRC ने गुरुवार को बताया कि दिल्ली मेट्रो के उड़न दस्ते ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर ठीक से मास्क नहीं पहनने एवं सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन नहीं करने पर करीब 348 यात्रियों का चालान किया है। वहीं, मंगलवार को नियमों का पालन नहीं करने पर 302 यात्रियों का चालान किया गया था।

    DMRC ने ट्विटर के माध्यम से यह जानकारी दी है कि ”हमारे यात्रा दिशानिर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली मेट्रो की सर्च टीम ने 24 मार्च 2021 को मास्क ठीक प्रकार से ना पहनने वाले लोगों और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करने पर 348 यात्रियों का चालान किया। DMRC ने कहा है कि कृपया कर सभी नियमों का पालन करें एवं औरों को भी ऐसा करने की सलाह दें।”

    दिल्ली में कोरोना संक्रमण के 1254 नए मामले सामने आए हैं ||

    दिल्ली में बुधवार को Covid -19  संक्रमण के 1,254 नए मामले सामने आए थे जो कि पिछले तीन महीने में सबसे अधिक प्रतिदिन सामने आने वाले मामलों की सबसे ज्यादा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी जानकारी के अनुसार, संक्रमण के नए मामले सामने आने के बाद कुल मामले बढ़कर 6,51,227 हो गए और अब तक 6,35,364 लाख लोग ठीक हो चुके हैं। यह भी कहा गया कि इस महामारी से छह और मरीजों की मौत के बाद यह आंकड़ा 10,973 पर पहुंच गया है। दिल्ली में अभी 4,890 एक्टिव मरीज हैं। मृतकों के मामले में पूरे देश में दिल्ली चौथे स्थान पर है। इस बीच दिल्ली में कंटेनमेंट जोन की संख्या को भी बढ़ाया जा रहा है । अभी दिल्ली में कंटेनमंट जोन की संख्या  976 कर गई है।

    दिल्ली में होली-नवरात्रि, शब-ए-बरात पर सार्वजनिक उत्सव नहीं मनाये जाएंगे ||

    Covid -19  संक्रमण के बढ़ते मामलों कि देखते हुए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने भी मंगलवार को आदेश दिया था  कि होली और नवरात्रि जैसे बड़े त्योहारों पर राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक रूप से समारोह नहीं मनाए जाएंगे। दिल्ली के मुख्य सचिव विजय देव ने अधिकारियों को आदेश दिया है  कि आदेश का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए । मुख्य सचिव विजय देव ने आदेश में कहा कि सभी संबंधित अधिकारी सुनिश्चित करेंगे कि होली, शब-ए-बारात, नवरात्रि आदि आगामी त्योहार के दौरान कहीं भी ज्यादा भीड़ इकट्ठी ना होने पाए और ना ही राजधानी दिल्ली में सार्वजनिक रूप से त्योहार नहीं मनाए जाएं। 

  • TMU तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में दो दिनी एजुकेशन कॉन्क्लेव – 2021 का शंखनाद #TMU EDUCATION CONCLAVE 2021

     

    नई शिक्षा नीति से युवाओं को मिलेंगे नए पंख


    खास
    बातें
     

    यशस्वी प्रधानमंत्री और
    लोकप्रिय मुख्यमंत्री देव पुरुष
     

    शिक्षक समाज में जागृति का
    संवाहक : गुलाब देवी

    डिग्री नहीं, अब काबिलियत
    चलेगी : कुलाधिपति

    डॉ. ढिल्लों बोले, बाबू ही
    पैदा किए मैकाले की शिक्षा नीति ने

    एनईपी को लागू करने के लिए
    की कमेटी गठित : डीआईओएस
       

    100 से अधिक
    प्रधानाचार्यों ने की कॉन्क्लेव में शिरकत
     


    माध्यमिक
    शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती गुलाब देवी ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में उम्मीद
    जताई
    , प्राइमरी
    शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक
    नई शिक्षा नीति-एनईपी के जरिए युवाओं
    को नए पंख मिलेंगे। मिसाइल मैन एवं जाने-माने शिक्षाविद डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का
    भावपूर्ण स्मरण करते हुए बोलीं
    , डॉ. कलाम कहते थे, सपने
    वे नहीं है
    , जो हम नींद में देखते है। सपने वे हैं, जो हमको नींद
    नहीं आने देते हैं। नई शिक्षा नीति युवाओं के सपनों को साकार करेगी। वह तीर्थंकर
    महावीर यूनिवर्सिटी के ऑडी में फैकल्टी और ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड कंप्यूटिंग साइंसेज-
    एफओईसीएस की ओर से आयोजित दो दिनी एजुकेशन कॉन्क्लेव –
    2021 में
    बोल रही थीं।
    इससे पूर्व माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री के संग-संग
    एमएलसी डॉ. हरि सिंह ढिल्लों
    , कुलाधिपति श्री सुरेश जैन और डीआईओएस
    श्री प्रदीप कुमार द्विवेदी ने
    माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करके एजुकेशन
    कॉन्क्लेव –
    2021
    का शंखनाद किया। इस मौके पर जीवीसी श्री मनीष जैन, रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा, एफओईसीएस के निदेशक
    प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी
    छात्र कल्याण निदेशक
    प्रो. एमपी सिंह
    , एसोसिएट डीन डॉ. मंजुला जैन, डीपीएस के प्राचार्य श्री सुदर्शन सोनार की गरिमामयी मौजूदगी रही।
    माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री श्रीमती गुलाब देवी
    , एमएलसी
    डॉ. हरि सिंह ढिल्लों समेत मंच पर मौजूद सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर
    सम्मानित किया गया। एजुकेशन कॉन्क्लेव –
    2021 में शिरकत करने
    आए अंग्रेजी और हिंदी मीडियम के
    100 से अधिक प्राचार्यों को
    बारी-बारी से शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया गया। इस मौके पर एसएंडटी रिव्यू जर्नल और
    अनलॉक द नॉलेज पत्रिका का भी विमोचन हुआ। एजुकेशन कॉन्क्लेव –
    2021 का आगाज एफओईसीएस के निदेशक प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी की एजुकेशन
    कॉन्क्लेव थीम से हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए
    उम्मीद जताई
    , एजुकेशन कॉन्क्लेव मील का पत्थर साबित होगी।
    अंत में रजिस्ट्रार डॉ. आदित्य शर्मा ने सभी अतिथियों का एजुकेशन कॉन्क्लेव –
    2021
    की शोभा बढ़ाने के लिए आभार व्यक्त किया। संचालन डॉ. सोनिया जयंत और
    नेहा आनंद ने किया।
     

     

    एजुकेशन
    कॉन्क्लेव –
    2021
    में एनईपी का श्रेय यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद मोदी और
    लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ को देते हुए श्रीमती गुलाब देवी ने कहा
    ,
    ये दोनों देव पुरुष की मानिंद हैं। शिक्षक समाज का प्रतिबिम्ब है,
    जबकि माँ बच्चे की पहली गुरु होती है। बोलीं,
    गुरू
    गोविन्द दोऊ खड़े
    , काके लागूं पांय, बलिहारी गुरू अपने गोविन्द दियो
    बताय
    क़बीरदास के दोहे  सरीखी
    हमारी शिक्षा की परम्परा रही है। उन्होंने बेहिचक स्वीकार किया
    , पुरानी शिक्षा पद्धति के तहत प्राइमरी शिक्षा की हालत दयनीय है, लेकिन न्यू एजुकेशन पॉलिसी से प्राइमरी शिक्षा के दिन बहुर जाएंगे।
    उन्होंने
    कहा
    , दुर्भाग्य से फर्जी शिक्षकों ने असल गुरुओं का दामन दागदार किया है।
    सच्चाई यह है
    , शिक्षक समाज में जागृति का संवाहक है, युवाओं का चरित्र निर्माण करता है, भारतीय संस्कृति
    और संस्कारों के प्रति समर्पित होता है और नकारात्मक विचारों को सकारात्मकता में
    परिवर्तित करता है। माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री कोरोना को बड़ा शत्रु बताते हुए
    बोलीं
    , यह फिर से सिर उठा रहा है, इसीलिए
    डब्ल्यूएचओ की तय गाइडलाइन्स के तहत हमें सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन करना
    है। मास्क को नहीं छोड़ना है।
    जीवन-मरण की इस लम्बी लड़ाई में कुलाधिपति श्री
    सुरेश जैन और जीवीसी श्री मनीष जैन के उल्लेखनीय योगदान की चर्चा करते हुए बोलीं
    , टीएमयू
    कोविड-
    19 हॉस्पिटल का आला प्रबंधन केंद्र और प्रदेश सरकारों के
    दिशा-निर्देशों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता रहा है और चल रहा है। इसके लिए
    कुलाधिपति श्री सुरेश जैन और जीवीसी श्री मनीष जैन को साधुवाद देती हूँ।
       

     

    TMU कुलाधिपति
    श्री सुरेश जैन (Suresh Jain) बोले
    , इसमें कोई शक नहीं है कि गांव-गांव और कस्बे-कस्बे में शिक्षा के मंदिर खुले
    हैं
    , लेकिन दुर्भाग्य यह है, स्नातक
    उत्तीर्ण छात्र जॉब के लिए एक अर्जी भी ड्रफ्ट नहीं कर पाता है। यह हमारी शिक्षा
    प्रणाली का ही दोष है। अब नॉलेज का जमाना है
    , डिग्री का
    नहीं। अब काबिलियत चलेगी। अपने सारगर्भित सम्बोधन से पूर्व ऑडी में मौजूद सभी
    शिक्षावादों का दिल की गहराइयों से खैरमकदम करते हुए बोले
    , हम
    तो इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करते हैं
    , लेकिन आप देश बनाते हैं।
    उन्होंने शिक्षाविदों से नई शिक्षा नीति को मेहनत और ईमानदारी से क्रियान्वयन करने
    का आग्रह किया ताकि आने वाली पीढ़ी काबिलियत की कसौटी पर खरा उतर सके।
     

     

    बतौर मुख्य अतिथि एमएलसी डॉ.
    हरि सिंह ढिल्लों एनईपी की खूबियां गिनाते हुए बोले
    , मैकाले की शिक्षा नीति ने केवल बाबू
    ही पैदा किए हैं
    , लेकिन नई शिक्षा नीति से युवाओं के लिए नए
    द्वार खुलेंगे। उन्होंने एनईपी को युवाओं के लिए वरदान बताते हुए कहा
    , उच्च शिक्षा में जहां एक ही वक्त में दो-दो डिग्री लेने का प्रावधान है,
    वहीं प्राइमरी तक बच्चे अब मातृभाषा में पढ़ाई कर सकेंगे। इससे भारत
    की मेधा का विदेशी पलायन रुकेगा। अपनी ऐतिहासिक जीत से गदगद डॉ. ढिल्लों ने ऑडी
    में मौजूद शिक्षाविदों का शुक्रिया अदा करते हए कहा
    , अब
    तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी समेत वित्त विहीन स्कूलों के शिक्षकों को एमएलसी
    चुनाव में वोट देने का अधिकार हासिल हो गया है। अब ये अपना पसंदीदा एमएलसी चुन
    सकेंगे ताकि इनकी आवाज विधान परिषद में बुलंद हो सकेगी। इससे पूर्व डीआईओएस श्री
    प्रदीप कुमार द्विवेदी बतौर गेस्ट ऑफ़ ऑनर बोले
    , शिक्षा एवं
    शिक्षकों की
      राष्ट्र को गौरवशाली बनाने में अहम भूमिका
    है। लक्ष्य की प्राप्ति में एनईपी का सफल क्रियान्वयन बेहद जरुरी है। शासन के
    निर्देश पर इसके अनुपालन के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया गया है। गुरुओं के महत्व
    पर प्रकाश डालते हुए बोले
    , भारत को सांदीपनि, राम कृष्ण परमहंस और चाणक्य जैसे महान गुरुओं की दरकार है। डीपीएस के
    प्राचार्य श्री सुदर्शन सोनार ने भी गहनता से न्यू एजुकेशन पॉलिसी के विभिन्न
    पहलुओं पर प्रकाश डाला। एजुकेशन कॉन्क्लेव के दूसरे सत्र में न्यू एजुकेशन पॉलिसी
    पर तीन शिक्षाविदों ने की-नोट एड्रेस प्रस्तुत किए। शिक्षा निदेशालय
    , दिल्ली की नीलम कुलश्रेष्ठ, तीर्थंकर महावीर
    यूनिवर्सिटी से डॉ. पंकज गोस्वामी ने एनईपी के विभिन्न पहलुओं जबकि टीएमयू के ही
    डॉ. संदीप वर्मा ने एनईपी की खूबियों और चुनौतियों पर विश्लेषणात्मक व्याख्यान
    दिया। एजुकेशन कॉन्क्लेव के दूसरे दिन दो सत्र होंगे
    , जिसमें
    सात शिक्षाविद अपना नजरिया रखेंगे।

  • नारी हमेशा अपराजिता की  मानिंद करें काम : TMU कुलाधिपति 

    TMU तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी में भारत विकास परिषद के रुहेलखंड प्रान्त का रीजनल महिला सम्मेलन- अपराजिता 

    मुख्य बातें 

    कुलाधिपति और फर्स्ट लेडी किए गए सम्मानित 

    राष्ट्रीय अध्यक्ष बोले, नारी को दें बराबरी का दर्जा

     कल्चरल डवलपमेंट में नारी का अमूल्य योगदान : खेड़ा

    राजश्री बोलीं, सकारात्मक परिवर्तन नारी के बिना असंभव

    महिलाओं का शिक्षित होना जरुरी : डॉ. लहरी 

    TMU तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन सभी अतिथियों का दिल की गहराइयों से अभिनन्दन करते हुए बतौर मुख्य अतिथि बोले, नारी न अबला है, न ही सबला है, बल्कि जीवन भर सभी की भलाई चाहती है। पुरुषों के विकास में महिलाओं की उल्लेखनीय भूमिका है। इसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है। महिलाओं की जरा-सी भी अनदेखी किसी भी परिवार को अंधेरे की ओर धकेल देती है। हमें अच्छे संस्कार घर से ही मिलते हैं। ऐसे में महिलाओं से मेरा विनम्र अनुरोध है, वे परिवार, संस्कार और रिश्तों पर अपना ध्यान केंद्रित करें। साथ ही कुलाधिपति ने देश में जनसंख्या की बेहताशा वृद्धि पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने सामाजिक असंतुलन पर गहरी चिंता जताई। अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने इशारों-इशारों में गैर बराबरी जनसंख्या के चलते भविष्य की भयावह तस्वीर का भी संकेत दिया। बोले, ऐसे में हमें अपनी मानसिकता में बदलाव की दरकार है। हम ठान लें तो इस संकल्प का सन्देश पूरे राष्ट्र के अंतिम जन तक पहुँच जाएगा। हमें हमेशा अपराजिता की मानिंद काम करना चाहिए। उन्होंने भारत विकास परिषद के कामकाज की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा, महिलाओं को संस्कारवान, सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर बनाने में भारत विकास परिषद की अहम भूमिका है। राष्ट्रीय सेवक संघ हमारी संस्कृति, संस्कार और परम्पराओं की रक्षा कवच है। अंत में उन्होंने इस शेर के साथ से अपनी वाणी को विराम दिया- आप आइए तो सही, हमारी महफिल में मेहमां बनकर, खैरमकदम को हमारी आंखें होंगी…। कुलाधिपति के सारगर्भित सम्बोधन पर अंत में स्टैंडिंग ओवेशन से ऑडी गूंज उठा। इससे पूर्व तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के ऑडी में माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके भारत विकास परिषद के रीजनल महिला सम्मेलन- अपराजिता का शंखनाद हुआ। इस मौके पर कुलाधिपति श्री सुरेश जैन और फर्स्ट लेडी श्रीमती वीना जैन को अंग वस्त्रम, स्मृति चिन्ह और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। रचना मित्तल की ओर से सम्पादित पत्रिका- अपराजिता का भी विमोचन हुआ। कुलाधिपति को भी अपराजिता पत्रिका सादर भेंट की गई। उल्लेखनीय है, भारत विकास परिषद का यह रीजन वेस्ट यूपी और उत्तराखंड में बांटा है। इसमें रुहेलखंड समेत छ्ह प्रान्त और मुरादाबाद समेत 29 जिले आते हैं। इस मौके पर भारत विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गजेंद्र सिंह संधू, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री सुनील खेड़ा, राष्ट्रीय मंत्री एवं समन्वयक डॉ. नितिन दालभ, राष्ट्रीय डिप्टी चेयरपर्सन, महिला एवं बाल विकास प्रकल्प श्रीमती राजश्री गांधी, प्रान्तीय अध्यक्ष श्री जगन्नाथ चावला, प्रान्तीय महिला संयोजक श्रीमती अलका विश्नोई, सदस्य महिला एवं बाल विकास प्रकल्प समिति  डॉ. दिव्या लहरी की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। संचालन बारी-बारी से डॉ. तरुण शर्मा, श्रीमती योगेश वशिष्ठ और श्रीमती राजुल अग्रवाल ने किया।

    रुहेलखंड प्रान्त की ओर से आयोजित महिला सम्मेलन में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गजेंद्र सिंह संधू बोले, भारत विकास परिषद एक परिवार की मानिंद है। सभी को साथ लेकर चलते आए हैं, चलते रहेंगे। नारी को हमेशा बराबरी का दर्जा देना चाहिए। बैलगाड़ी का उदाहरण देते हुए बोले, गाड़ी के दोनों पहियों का संतुलन होना जरुरी है। इसी तरह परिवार में भी पति और पत्नी के बीच संतुलन अनिवार्य है। श्री संधू ने बराबरी के तमाम उदाहरण देते हुए अंत में कहा, किसी भी राष्ट्र के उत्थान में एकता का खास महत्व है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री सुनील खेड़ा भारतीय विकास परिषद को अनूठा बताते हुए बोले, सांस्कृतिक विकास के लिए महिलाओं की सहभागिता में संकल्पित हैं। गुलामी के एक हजार वर्षों में भारत की सांस्कृतिक विरासत को तहस-नहस कर दिया है, लेकिन नारी ने घर के भीतर रहकर भी पूजा पद्धति और संस्कृति को बचाए रखा है। भारत के कल्चरल डवलपमेंट में महिलाओं का योगदान अविस्मरणीय है। उम्मीद करता हूँ, इस रीजनल महिला सम्मलेन से आपको नई ऊर्जा मिलेगी। आप इसका उपयोग पोस्ट कोविड में करें। जानी-मानी पर्वतारोही डॉ. अरुणिमा सिन्हा का उल्लेख करते हुए बोले, दिव्यांग होने के बावजूद मानसिक तौर पर बेहद सशक्त हैं। डॉ. सिन्हा को अपराजिता बताते हुए बोले, नारियों को डॉ. सिन्हा का अनुसरण करना चाहिए, इसीलिए लिए नारी वंदनीय है, पूजनीय है। 

    राष्ट्रीय डिप्टी चेयरपर्सन एवं महिला एवं बाल विकास प्रकल्प श्रीमती राजश्री गांधी ने इन पंक्तियों से अपनी बात प्रारम्भ की- थोड़ा-सा बिखर जाऊं, मैंने ठानी है -ज़िदगी थोड़ा रुक मैंने हार कहां मानी हैं। बोलीं, कोई भी सकारात्मक परिवर्तन नारी के बिना संभव नहीं है। जिस देश में आधी से ज्यादा महिला शक्ति है तो उस देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। महिला से अधिक शक्तिशाली कोई नहीं है, इन्हें विरासत खुद बनानी पड़ती है। जब महिला घर का बजट संभाल सकती है तो वह अपने आप मैं सशक्त है। कोरोना काल में मातृ शक्ति ने अलग-अलग प्रांतों में अनेक प्रतियोगिताओं की रिपोर्टिंग की है। उन्होंने महिलाओं की प्रोत्साहित करते हुए कहा, हमें मिलजुल कर काम करना है और सशक्तिकरण को मजबूत बनाना है।

    सदस्य महिला एवं बाल विकास प्रकल्प समिति डॉ. दिव्या लहरी जाने-माने आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद का भावपूर्ण स्मरण करते हुए बोलीं, समाज के विकास के लिए स्त्री का शिक्षित होना जरुरी है। शिक्षित महिला से ही समाज सशक्त बनता है। यदि नारी शिक्षित नहीं हुई तो पूरा समाज पिछड़ जाएगा। भारत विकास परिषद भी स्वामी विवेकानंद के बताए रास्ते पर चल रहा है। कोविड के मुश्किल समय में भी परिषद महिलाओं के प्रति संजीदा रहा। अपराजिता कार्यक्रम में श्री ओम प्रकाश, श्री कृष्णानंद, श्री पवन जैन, रामपुर महिला विंग की संयोजिका श्रीमती रमा अग्रवाल और  प्रान्तीय अध्यक्ष की धर्मपत्नी श्रीमती सतनाम चावला, डॉ. कंचन गुप्ता आदि भी मौजूद रहे।   

  • सोशल मीडिया पर उगला जहर तो होगी सख्त कार्यवाही

    सोशल मीडिया पर उगला जहर तो होगी सख्त कार्यवाही, भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म के लिए नई गाइडलाइन जारी कि है |  

    क्या क्या नियम बनाए है आइए जानते है |

    1. सबसे पहले हर कंपनी को नई गाइडलाइंस के मुताबिक सोशल मीडिया को एक शिकायत 

    सेल बनाना होगा |

    2. अगर शिकायत पर कोई कंटेंट हटाने से पहले उसके कारण का बताना जरूरी होगा

    3. किसी  की  शिकायत करने पर आपत्तिजनक पोस्ट या झूठ और अफवाह फैलाने वाले कंटेंट को 24 घंटे में हटाना होगा 

    4. प्रत्येक महीने दर्ज  शिकायतों  पर कार्रवाई की जानकारी देनी होगा 

    5. भारत सरकार द्वारा बने सोशल मीडिया के ये नियम तीन महीने के अंदर लागू होंगे 

    6. एक चीफ कंप्लायंस ऑफिसर की नियुक्ति करना आवश्यक , जो कि सोशल मीडिया नियमों के कप्लांयस को लेकर जिम्मेदारी होगा

    7. एक नोडल कॉन्टैक्ट ऑफिसर की  नियुक्ति भी करनी होगी, जो 24X7 लॉ इनफोर्समेंट एजेंसियों से कोनेक्ट रहेगा 

    8. ये दोनों अधिकारी भारत में रहने वाले होंगे तभी इनको नियुक्त किया जा सकेगा 

    9. एक रेजिडेंट ग्रीफांस अधिकारी की  नियुक्ति भी आवश्यक करनी होगी 

    10. जो सबसे पहले कोई पोस्ट डालेगा उसकी  की जानकारी देना भी आवश्यक होगा 


    OTT के लिए भी नई गाइडलाइंस जारी कि गई है 

    सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ साथ OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए भी नई गाइडलाइंस  जारी की गई है . मीडिया के हर प्लेटफॉर्म के लिए नियम जरूरी है. इसलिए OTT कंपनियों को आदेश दिया  गया था कि वो न्यूज मीडिया की तरह एक सेल्फ रेगुलेशन बनाएं, लेकिन OTT कंपनियों ने ऐसा नहीं किया . सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स कि आजादी  लोकतंत्र की आत्मा है, जिस प्रकार  फिल्मों के लिए एक सेंसर बोर्ड  बनाया गया  है, वैसे ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए होना कहिए था  लेकिन OTT के लिए ऐसा कोई बोर्ड नहीं बना था  है. इसलिए एक सेंसर बोर्ड तैयार होना चाहिए. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को झूठ और अफवाह फैलाने का कोई अधिकार नहीं  है.  

    1. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  पर दर्शकों की उम्र के हिसाब से कंटेंट के लिए वर्ग बनाए जाएंगे 

    2. OTT प्लेटफॉर्म पर कंटेंट की पांच कैटेगरी मे रखा जाएगा 

    3. U, U/A 7+, U/A 13+, U/A 16+, और A पांच कैटेगरी होगी. 

    4. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट के लिए  पैरेंटल लॉक की सुविधा देनी होगी 

    5. एथिक्स कोड टीवी, सिनेमा जैसा ही होगा 

    6. OTT प्लेटफॉर्म्स को सेल्फ रेगुलेशन बॉडी (स्वचालित रूप से चुने गए हैं और इसमें संवेदनशील सामग्री हो सकती है) बनानी होगी 

    7. यदि कोई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर  फर्जी कंटेंट डालता है तो डालने वाले पर सख्त कार्रवाई की जाएगी |