मोदी की कूटनीति: एक नई परिभाषा

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भारत की राजनीति और कूटनीति के इतिहास में जब-जब चुनौतियाँ आई हैं, तब-तब नेतृत्व ने अपने निर्णयों और दृष्टिकोण से दुनिया को चौंकाया है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने जिस प्रकार से कूटनीति को एक नया आयाम दिया है, वह अभूतपूर्व है। उनके नेतृत्व में भारत ने न केवल अपने दुश्मनों को करारा जवाब दिया है, बल्कि विश्व पटल पर अपनी प्रतिष्ठा भी और अधिक मजबूत की है। पाकिस्तान, जो वर्षों से भारत की शांति और अखंडता को चुनौती देता रहा है, आज मोदी की रणनीति और कूटनीति के आगे नतमस्तक होने को मजबूर है।

भारत हमेशा से ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांत में विश्वास करता आया है। हमारी संस्कृति और सभ्यता सहिष्णुता और शांति की मिसाल रही है। हमने बार-बार अपने पड़ोसियों को उनकी गलतियों के बावजूद माफ किया, इस आशा के साथ कि वे सुधरेंगे, शांति का मार्ग अपनाएंगे। लेकिन पाकिस्तान ने हर बार भारत की सहनशीलता को उसकी कमजोरी समझा। आतंकवाद को अपनी नीति का हिस्सा बनाकर उसने बार-बार भारत की संप्रभुता को चोट पहुँचाने का प्रयास किया।

पहाड़ों से घिरे खूबसूरत पहलगाम में जब निर्दोष और निहत्थे पर्यटकों पर हमला हुआ, तब पूरे देश का दिल दहल उठा। हर भारतीय के मन में गुस्सा था। हर दिल से एक ही आवाज उठ रही थी कि अब बहुत हो चुका। अब कोई समझौता नहीं। इस दुख की घड़ी में प्रधानमंत्री मोदी सऊदी अरब के दौरे पर थे। देशवासियों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया – क्या प्रधानमंत्री दौरा रद्द कर वापस आएंगे? क्या अब कोई कड़ा कदम उठाया जाएगा? और मोदी ने वही किया, जिसकी उम्मीद एक सशक्त नेतृत्व से होती है। उन्होंने दौरा रद्द किया, वापस लौटे और तुरंत अपनी रणनीति बनाने में जुट गए।

देश की सुरक्षा के लिए उन्होंने हर पहलू पर मंथन किया। बिहार का दौरा कर देश के जमीनी हालात को समझा, रक्षा मंत्रालय और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से गहन चर्चा की। उन्होंने विपक्ष से भी संवाद किया, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा के इस गंभीर मुद्दे पर एकजुटता बनी रहे। विपक्ष ने भी इस बार देशहित में कदम आगे बढ़ाते हुए समर्थन दिया। यह वही क्षण था जब राजनीतिक मतभेदों को किनारे रखकर पूरा देश एक आवाज में बोल रहा था – दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब चाहिए।

विश्व मंच पर भारत की छवि लगातार मजबूत होती रही। अंतरराष्ट्रीय मीडिया भारत की हर गतिविधि पर नजर रखे हुए थी। पाकिस्तान यह सोचकर खुश हो रहा था कि भारत सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहेगा। लेकिन उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि मोदी की कूटनीति में कितनी गहराई है और भारतीय सेना की क्षमता कितनी अद्भुत। जब भारतीय सेना ने दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और सफल हमले किए, तो पाकिस्तान हक्काबक्का रह गया।

मोदी की कूटनीति का जादू सिर्फ सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने दुनिया के शक्तिशाली देशों को भी भारत के साथ खड़ा कर दिया। अमेरिका, इजरायल, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया और अरब देशों ने खुलकर भारत के कदमों का समर्थन किया। पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलगाव की स्थिति पैदा हो गई। न केवल उसकी कूटनीतिक हार हुई, बल्कि उसके भीतर भी असंतोष की लहर दौड़ गई। नवाज शरीफ को इमरान खान जैसे विरोधियों से भी समर्थन नहीं मिला। पाकिस्तान के अंदरूनी हालात डगमगाने लगे।

मोदी की रणनीति ने एक स्पष्ट संदेश दिया – भारत अब सहनशीलता की आड़ में कमजोरी नहीं दिखाएगा। भारत अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और नागरिकों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा। उनकी कूटनीति में संतुलन है – जहाँ एक ओर उन्होंने विश्व के बड़े देशों का समर्थन पाया, वहीं दूसरी ओर पड़ोसियों के साथ शांति का मार्ग भी खुला रखा। यह संतुलन ही मोदी की सबसे बड़ी ताकत बन गई।

आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो पाते हैं कि मोदी ने जिस धैर्य, दूरदर्शिता और साहस के साथ इस संकट का सामना किया, वह इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। उनके निर्णयों ने न केवल पाकिस्तान को उसकी औकात दिखा दी, बल्कि भारतवासियों के मन में यह विश्वास भी जगा दिया कि अब देश सुरक्षित हाथों में है।

पाकिस्तान की हालत ऐसी हो गई कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी बात रखने के लिए गिड़गिड़ाने लगा। उसका कोई साथी नहीं रहा। विश्व समुदाय भारत के साथ खड़ा रहा। यह मोदी की कूटनीति की सबसे बड़ी जीत थी। उनकी रणनीति ने साबित कर दिया कि अगर नेतृत्व मजबूत हो, दूरदृष्टि से युक्त हो और देशहित को सर्वोपरि माने, तो कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

आज भारत न केवल एशिया बल्कि दुनिया की एक बड़ी शक्ति के रूप में उभर रहा है। मोदी की कूटनीति ने भारत को वह आत्मविश्वास दिया है, जिसकी हमें सदियों से जरूरत थी। अब कोई भारत की सहिष्णुता को कमजोरी समझने की भूल नहीं करेगा। क्योंकि अब भारत के पास एक ऐसा नेतृत्व है, जो शांति भी चाहता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर युद्ध भी जीत सकता है।

नरेंद्र दामोदरदास मोदी – यह नाम पाकिस्तान कभी नहीं भूल पाएगा। यह नाम भारत के इतिहास में गर्व, शौर्य और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बन चुका है। भारत आगे बढ़ रहा है, और मोदी की कूटनीति ने इस यात्रा को और भी सशक्त बना दिया है।

उपसंपादक आपकी चौपाल न्यूज
मोहित गुप्ता मुरादाबाद

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