आज का हिन्दू पंचांग

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दिनांक – 20 मई 2025

⛅दिन – मंगलवार

⛅विक्रम संवत् – 2082

⛅अयन – उत्तरायण

⛅ऋतु – ग्रीष्म

⛅मास – ज्येष्ठ

⛅पक्ष – कृष्ण

⛅तिथि – अष्टमी प्रातः 04:55 मई 21 तक तत्पश्चात् नवमी

⛅नक्षत्र – धनिष्ठा शाम 07:32 तक तत्पश्चात् शतभिषा

⛅योग – इन्द्र रात्रि 02:50 मई 21 तक तत्पश्चात् वैधृति

⛅राहुकाल – दोपहर 03:56 से शाम 05:36 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)

⛅सूर्योदय – 05:57

⛅सूर्यास्त – 07:16 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त अहमदाबाद मानक समयानुसार)

⛅दिशा शूल – उत्तर दिशा में

⛅ब्रह्ममुहूर्त – प्रातः 04:31 से प्रातः 05:14 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)

⛅अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 12:10 से दोपहर 01:03

⛅निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:15 मई 21 से रात्रि 12:58 मई 21 तक (अहमदाबाद मानक समयानुसार)

⛅व्रत पर्व विवरण – मासिक कृष्ण जन्माष्टमी, कालाष्टमी

⛅विशेष – अष्टमी को नारियल का फल खाने से बुद्धि का नाश होता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)

🌹 ब्रह्मचर्य-पालन के नियम 🌹

(ब्रह्मलीन ब्रह्मनिष्ठ स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज के प्रवचन से)

ऋषियों का कथन है कि ब्रह्मचर्य ब्रह्म-परमात्मा के दर्शन का द्वार है, उसका पालन करना अत्यंत आवश्यक है । इसलिए यहाँ हम ब्रह्मचर्य-पालन के कुछ सरल नियमों एवं उपायों की चर्चा करेंगेः

1. ब्रह्मचर्य तन से अधिक मन पर आधारित है । इसलिए मन को नियंत्रण में रखो और अपने सामने ऊँचे आदर्श रखो ।

2. आँख और कान मन के मुख्यमंत्री हैं । इसलिए गंदे चित्र व भद्दे दृश्य देखने तथा अभद्र बातें सुनने से सावधानी पूर्वक बचो ।

3. मन को सदैव कुछ-न-कुछ चाहिए । अवकाश में मन प्रायः मलिन हो जाता है । अतः शुभ कर्म करने में तत्पर रहो व भगवन्नाम-जप में लगे रहो ।

4. ‘जैसा खाये अन्न, वैसा बने मन ।’ – यह कहावत एकदम सत्य है । गरम मसाले, चटनियाँ, अधिक गरम भोजन तथा मांस, मछली, अंडे, चाय कॉफी, फास्टफूड आदि का सेवन बिल्कुल न करो ।

5. भोजन हल्का व चिकना स्निग्ध हो । रात का खाना सोने से कम-से-कम दो घंटे पहले खाओ ।

6. दूध भी एक प्रकार का भोजन है । भोजन और दूध के बीच में तीन घंटे का अंतर होना चाहिए ।

7. वेश का प्रभाव तन तथा मन दोनों पर पड़ता है । इसलिए सादे, साफ और सूती वस्त्र पहनो । खादी के वस्त्र पहनो तो और भी अच्छा है । सिंथेटिक वस्त्र मत पहनो । खादी, सूती, ऊनी वस्त्रों से जीवनीशक्ति की रक्षा होती है व सिंथेटिक आदि अन्य प्रकार के वस्त्रों से उनका ह्रास होता है ।

8. लँगोटी बाँधना अत्यंत लाभदायक है । सीधे, रीढ़ के सहारे तो कभी न सोओ, हमेशा करवट लेकर ही सोओ । यदि चारपाई पर सोते हो तो वह सख्त होनी चाहिए ।

9. प्रातः जल्दी उठो । प्रभात में कदापि न सोओ । वीर्यपात प्रायः रात के अंतिम प्रहर में होता है ।

10. पान मसाला, गुटखा, सिगरेट, शराब, चरस, अफीम, भाँग आदि सभी मादक (नशीली) चीजें धातु क्षीण करती हैं । इनसे दूर रहो ।

11. लसीली (चिपचिपी) चीजें जैसे – भिंडी, लसौड़े आदि खानी चाहिए । ग्रीष्म ऋतु में ब्राह्मी बूटी का सेवन लाभदायक है । भीगे हुए बेदाने और मिश्री के शरबत के साथ इसबगोल लेना हितकारी है ।

12. कटिस्नान करना चाहिए । ठंडे पानी से भरे पीपे में शरीर का बीच का भाग पेटसहित डालकर तौलिये से पेट को रगड़ना एक आजमायी हुई चिकित्सा है । इस प्रकार 15-20 मिनट बैठना चाहिए । आवश्यकतानुसार सप्ताह में एक-दो बार ऐसा करो ।

13. प्रतिदिन रात को सोने से ठंडा पानी पेट पर डालना बहुत लाभदायक है ।

14. बदहज्मी व कब्ज से अपने को बचाओ ।

15. सेंट, लवेंडर, परफ्यूम आदि से दूर रहो । इन्द्रियों को भड़काने वाली किताबें न पढ़ो, न ही ऐसी फिल्में और नाटक देखो ।

16. विवाहित हो तो भी अलग बिछौने पर सोओ ।

17. हर रोज प्रातः और सायं व्यायाम, आसन और प्राणायाम करने का नियम रखो ।

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